उत्तरी जिला की साइबर थाना पुलिस ने देशभर के ऑटो मोबाइल डीलर व राष्ट्रीय बैंकों से ठगी करने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है। आरोपियों की पहचान बागपत निवासी मनोज कुमार उर्फ मोनू (29), बेहटा-हाजीपुर, गाजियाबाद निवासी पंकज कुमार (28) और शाहदरा निवासी दीपक कुमार (26) के रूप में हुई है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन, दो अकाउंट और एक फर्जी आधार कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस को मामले में विनय कुमार यादव, हिमांशु पाल और अनुज कुमार कसाना समेत अन्य लोगों की तलाश है। इनकी तलाश की जा रही है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त सागर सिंह कलसी ने बताया कि पिछले दिनों उनकी टीम को गृह मंत्रालय के साइबर पोर्टल से एक शिकायत मिली थी।
शिकायतकर्ता नरेंद्र सिंह ने बताया कि वह दिल्ली में ऑटो मोबाइल कंपनी का डीलर है। पिछले दिनों उसके पास एक नामी कंपनी से ईमेल आया था। कंपनी ने एक बस खरीदने की इच्छा जताई थी। इसके बाद उसने कुछ जानकारी मांगी थी।
नरेंद्र ने अपनी कंपनी के लेटर हेड पर जानकारी दी और खाते की जानकारी के लिए एक रद्द चेक ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया। कुछ ही दिनों बाद उसके बैंक खाते से 11.52 लाख रुपये निकल गए।
जांच में पता चला कि आरोपियों ने नरेंद्र का फर्जी लेटर हेड बनाकर बैंक को एक खाते में पेमेंट करने के लिए भेजा था। आरोपियों ने बताया कि यह लोग एक विशेष एप के जरिये फर्जी आधार कार्ड बनवाकर सिम जारी करवा लेते थे। फिलहाल इन लोगों ने करीब 100 से अधिक सिमकार्ड जारी करवाए हुए थे। इनकी मदद से दिल्ली में 11.52 लाख, मथुरा में 24.72 लाख, कोलकाता में 25 लाख और तेलंगाना में 35 लाख की ठगी कर चुके हैं।
ऐसे करते थे वारदात
आरोपियों ने बताया कि वह लोग देशभर के बड़े ऑटो मोबाइल डीलर को बड़ी-बड़ी नामचीन कंपनियों के नाम से ईमेल भेजते थे। आरोपी कुछ वाहनों को खरीदने की इच्छा जाहिर करते थे। उसके बदले वाहनों की डिटेल के साथ खाते की डिटेल भी मांगी जाती थी। इनके खाते की जानकारी मिलते ही आरोपियों को पता चल जाता था कि किस बैंक में उनके खाते हैं।
उसके फर्जी आधार कार्ड की मदद से लिए गए सिमकार्ड के नंबरों को टूू-कॉलर पर पीड़ितों के नाम से सेव करवा दिया जाता था। बाद में बैंक को पीड़ितों के फर्जी लेटर हेड से उनकी ईमेल से मिलती-जुलती मेल से ईमेल किया जाता था। इसके बाद ट्रू-कॉलर पर सेव नंबरों से बैंक अधिकारियों को कॉल कर दिए गए खातों में तुरंत रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता था।