मौसम विभाग की तरफ से बृहस्पतिवार जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में देश में औसत वर्षा सामान्य (दीर्घावधि औसत/ एलपीए का 89-111फीसदी) होने की संभावना है, लेकिन उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के अधिकांश क्षेत्रों और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने के आसार हैं। वहीं, पश्चिमी और पूर्वोत्तर के कुछ भागों में सामान्य से लेकर अधिक बारिश हो सकती है। 1961-2010 के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल के दौरान देशभर में वर्षा का दीर्घावधि औसत करीब 39.3 मिलीमीटर है।
प्रशांत व हिंद महासागरों में समुद्र की सतह की हलचल प्रभावित करती है भारत की जलवायु
प्रशांत व हिंद महासागरों में समुंद्र की सतह के तापमान की स्थिति में परिवर्तन से भारतीय जलवायु को प्रभावित करती है। वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में ला-नीना की स्थिति है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि ला-नीना की स्थिति पूरे पूर्वानुमान अवधि के दौरान जारी रहने की संभावना है। वहीं, हिंद महासागर में हिंद महासागर द्विध्रुव(इंडियन ऑशन डाइपॉल) की स्थिति है, जो कि पूरे गर्मी के मौसम में जारी रहने की संभावना है। यहां बता दें कि हिंद महासागर पांच महासागरों में सबसे गर्म महासागर है। इसके बाद प्रशांत महासागर सबसे गर्म है। इन दिनों पूर्वी दिशा से चलने वाली हवाओं के कारण प्रशांत महासागर की पानी हिंद महासागर में मिलना शुरू होता है। इससे समुंद्र के ऊपरी सतह पर गर्म होती है। ऐसे में हिंद महसागर के पूर्वी दिशा इसका प्रभाव भारतीय मानसून पर भी पड़ता है।
मार्च में अधिकतम तापमान के आंकड़े
1973- 39.6 डिग्री सेल्सियस
2021- 40.1 डिग्री सेल्सियस
2022- 39.6 डिग्री सेल्सियस
मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक राजेंद्र जेनामणि के मुताबिक, मैदानी इलाकों में जब अधिकतम तापमान 40 से अधिक व सामान्य से साढ़े चार डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया जाता है, तब लू की घोषणा की जाती है। वहीं, अधिकतम तापमान 40 या इससे अधिक व सामान्य से साढ़े छह डिग्री सेल्सियस अधिक होने पर गंभीर स्तर की लू की घोषणा की जाती है।
इसलिए चलती है गर्म हवा
मौसम विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र विशेष में वायु मंडल की ऊपरी सतह पर जब उच्च वायु दाब का केंद्र बनता है तो वहां से गर्म हवा धरती की तरफ चलने लगती है। इनमें धरती से उठने वाली हवा भी मिल जाती है, जिससे गर्म हवा वायु मंडल में विलीन नहीं हो पाती। इस सबके मिलेजुले असर से उस क्षेत्र का वातावरण गर्म हो जाता है और लू चलने लगती है।