नई दिल्ली। राजधानी में निरंतर बढ़ प्रदूषण की समस्या दूर करने के लिए नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) ने कई योजनाएं तैयार की है। वहीं, इस दिशा में गत वर्षों के दौरान शुरू की गई योजनाओं का विस्तार भी करने निर्णय लिया है। इन सब योजनाओं के तहत इस साल सर्दी से पहले काम शुरू हो जाएगा।
ठंड के मौसम में प्रदूषण की समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है। एनडीएमसी इलाके में प्रदूषण सबसे अधिक स्पष्ट तौर पर दिखाई देता है। इससे लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है, जबकि एनडीएमसी क्षेत्र देश का अति विशिष्ठ इलाका है और यहां पर देश-विदेश के पर्यटक बड़ी संख्या में आते हैं। एनडीएमसी ने प्रदूषण की समस्या से निपटने वाली योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए बजट में राशि का प्रावधान किया है।
पेट्रोल-डीजल आधारित वाहनों की खरीद रुकेगी
एनडीएमसी ने प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए आंतरिक तौर पर भी कदम उठाने का निर्णय लिया है। इस दिशा में उसने पेट्रोल/डीजल आधारित कारों की खरीद को रोकने और भविष्य में केवल इलेक्ट्रिक कारों की ही खरीद करने का संकल्प लिया है। वह अपने मौजूदा वाहनों के बेड़े को भी चरणबद्ध रूप से परिवर्तित कर रही है। इसके अलावा पर्यावरण अनुकूल संचार की प्रवृत्ति को जारी रखते हुए स्मार्ट बाइक के स्थान पर ई-स्कूटर सेवा योजना शुरू करने की तैयारी की है।
ई-चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ेगी
एनडीएमसी ने इलेक्ट्रिक कारों को बढ़ावा देने के लिए ई-चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। क्षेत्र में अभी 60 से अधिक ई-चार्जिंग स्टेशन चल रहे हैं। इस वर्ष इनकी संख्या 100 से अधिक की जाएगी। इसके अलावा इन चार्जिंग स्टेशनों की क्षमता का भी विस्तार भी किया जाएगा। इन सुविधाओं के माध्यम से कम समय में कार चार्ज हो सकेगी।
साइकिल-इन-सिटी योजना पर काम
एनडीएमसी ने वाहनों का उपयोग कम करने का भी निर्णय लिया है। वह साइकिल-इन-सिटी योजना के तहत कार्यालय जाने वालों को सुरक्षित और आनंददायक तरीके से साइकिल चलाने की सुविधा के लिए साइकिल ट्रैक बनाने के कार्य को पूरा कराएगा। साइकिल-इन-सिटी योजना के लिए प्रमुख मार्ग पर साइकिल ट्रैक बनाने की योजना पर काम चल रहा है।
हरियाली को दिया जाएगा बढ़ावा
एनडीएमसी ने अपने इलाके में हरियाली बढ़ाने की भी योजना तैयार की है। इसके तहत हरित पट्टियों को तेजी से विकसित किया जाएगा। खासतौर पर चौराहों और फुटपाथों पर हरियाली बढ़ाई जाएगी। इस वर्ष मानसून के दौरान व्यापक स्तर पर पौधे रोपने का निर्णय लिया गया है।