नई दिल्ली। लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गों राजू और जीतू से ट्रेनिंग लेकर राजेंद्र और उसके भाई नरेंद्र ने सोशल मीडिया पर वेबपेज बनाया था। राजू और जीतू ने उन्हें बताया था कि कैसे सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जाता है। सोशल मीडिया पर एक्टिव होने के बाद राजेंद्र व नरेंद्र खालिस्तानी समर्थकों और अन्य गैंगस्टरों से जुड़ गए। इसके साथ यह झारखंड के गैंगस्टर अमन साहू के भी संपर्क में आए। बदमाश वेबपेज पर दिए गए नंबरों के आधार पर इनसे संपर्क कर हथियार मंगवाते थे।
झारखंड का गैंगस्टर अमन साहू राजेंद्र और नरेंद्र से हथियार लेने के अलावा बाकी तस्करों से भी हथियार लेता था। राजेंद्र और नरेंद्र फेसबुक के अलावा व्हाट्सएप पर भी संपर्क कर हथियार सप्लाई कर रहे थे। राजेंद्र का पिता प्रीतम सिंह भी हथियार बनाकर सप्लाई करता था। राजेंद्र और नरेंद्र अपने अन्य भाइयों समेत तस्करी में जुटे हुए थे। पुलिस के मुताबिक आरोपी की बनी पिस्तौल और सरकारी आयुध फैक्टरी में बने असलहे में फर्क करना बेहद मुश्किल था। आरोपी सात हजार की पिस्टल को 25 से 50 हजार रुपये वसूल करते थे। राजेंद्र के खिलाफ दो आपराधिक मामले और बबलू सिंह के खिलाफ कई कई मामले दर्ज हैं। बबलू राजेंद्र और नरेंद्र के कहने पर हथियार सप्लाई करते हैं।