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दिल का दान : महिला के दिल ने चंडीगढ़ से भरी उड़ान, दिल्ली में बचाई अजनबी की जान

Fri, 07 Jan 2022 04:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

बुलंदशहर निवासी युवक महीनों से था बीमार। इस साल एम्स में यह पहला प्रत्यारोपण। पंजाब की एक महिला के ब्रेन डेड होने के बाद परिजनों ने किया अंगदान।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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पंजाब की एक महिला का दिल अब उत्तर प्रदेश के रहने वाले युवक के सीने में धड़कने लगा है। करीब 250 किमी. का सफर कर धड़कता दिल दिल्ली लाया गया, जहां युवक के शरीर में प्रत्यारोपित कर दिया गया।

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दिल्ली एम्स में साल का पहला हृदय प्रत्यारोपण रहा। बृहस्पतिवार देर रात डॉक्टरों ने कहा कि अब युवक की हालत जोखिम से बाहर है। फिलहाल वह चिकित्सीय निगरानी में है। इससे पहले एक प्रत्यारोपण साल 2021 में हुआ था। कोरोना महामारी के बीच प्रत्यारोपण की प्रक्रिया काफी जटिल रहती है, लेकिन एम्स की टीम ने इस चुनौती का बेहतर तरीके से सामना किया और प्रत्यारोपण सफल रहा।  

पंजाब की एक महिला के ब्रेन डेड होने के बाद परिजनों ने अंगदान का निर्णय लिया। 43 वर्षीय महिला के अंगदान की सूचना मिलने पर एम्स की एक टीम बुधवार रात 2 बजे सड़क के रास्ते चंडीगढ़ पीजीआई के लिए रवाना हुई। एम्स में पहले से ही उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर निवासी 39 वर्षीय एक युवक का नाम वेटिंग में था, जो कई माह से बीमार था। उसका हृदय प्रत्यारोपण होना जरूरी था।
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वहीं, दूसरी टीम मरीज को अस्पताल बुलाकर प्रत्यारोपण की तैयारियों में जुट गई। 12.05 बजे महिला के शरीर से दिल निकाला गया और 2.10 बजे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचा। एम्स परिसर तक समय रहते दिल लाने के लिए पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया। एयरपोर्ट से एम्स पहुंचने में 25 मिनट का समय लगा। एम्स के वरिष्ठ डॉ. मिलिंद होटे ने बताया कि प्रत्यारोपण सफल रहा और मरीज की हालत अब स्थिर है। यह दिल्ली एम्स में 79वां हृदय प्रत्यारोपण है।

बुलंदशहर निवासी मरीज का दिल काफी कमजोर हो गया था। उसके पास प्रत्यारोपण के अलावा कोई विकल्प नहीं था, लेकिन देश में पहले से ही काफी कम अंगदान सालाना होते हैं। इसलिए मरीज को वेटिंग में रखा गया था। बुधवार को सूचना मिलते ही टीम दिल्ली से चंडीगढ़ पहुंची।

सुबह पीजीआई में उन्होंने प्रक्रिया शुरू की और दोपहर 12 बजे के बाद टीम तत्काल दिल्ली के लिए रवाना हुई। चूंकि, अंग को कुछ ही घंटों में प्रत्यारोपित करना पड़ता है। ऐसे में जरा भी देरी सभी प्रयास विफल कर सकती है।

उन्होंने बताया कि एम्स की टीम प्रत्यारोपण को लेकर काफी अनुभवी है। करीब चार से पांच घंटे तक प्रत्यारोपण की सर्जरी चली और मरीज अब खतरे से बाहर है। अगले कुछ दिन में उसे छुट्टी दे दी जाएगी।
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