खूबसूरत स्थलाकृतियों के बीच फव्वारे से निकलता पानी सीढ़ियों से होकर नीचे उतरता ऐसा लगता है जैसे झरने से पानी बह रहा हो। व्यस्त एम्स-आईएनए फ्लाईओवर के नीचे बनाया गया फव्वारा इन दिनों आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जैसे-जैसे धूप हटती है, तो शाम ढलने पर फव्वारे के इर्द-गिर्द लगी एलईडी लाइटों के रोशन होने का लोग बेसब्री से इंतजार करने लगते हैं।
नई दिल्ली पालिका परिषद (एनडीएमसी) की ओर से निर्मित फव्वारा इन दिनों दिल्लीवासियों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है। दिल्ली में अब तक के सर्वाधिक ऊंचाई (15 फीट) वाले इस फव्वारे के नजदीक से गुजरने वाला हर व्यक्ति कुछ पल के लिए इस स्थलाकृति और फव्वारे की खूबसूरती निहारने के बाद ही वाहन को रफ्तार देता है। रविवार को सप्ताहांत कर्फ्यू के दिन भी ट्रायल के दौरान यहां लोगों के पहुंचने का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा।
ऊपरी हिस्से में स्टील की कलाकृतियां
करीब 30 मीटर की परिधि में सीढ़ीनुमा स्थलाकृति के ऊपरी हिस्से में स्टील की कलाकृतियां लगाई गई हैं। चमचमाती आकृतियों पर जब पानी की बूंदे गिरती हुई सीढ़ियों से नीचे उतरती हैं तो इसकी तारीफ करने से खुद को कोई रोक नहीं पाता। एनडीएमसी के एक अधिकारी के मुताबिक, इसका निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन औपचारिक उद्घाटन से पहले ट्रायल के तौर पर फव्वारे को चलाया जा रहा है। फव्वारा रोज सुबह 8 से 11 बजे तक, दोपहर एक से तीन बजे तक और शाम पांच से रात 8.30 बजे तक चलाया जा रहा है।
मशरूम की शक्ल ने बनाया जीवंत
मशरूम की शक्ल में निर्मित इस स्थलाकृति के चारों तरफ लाइटें लगाई गई हैं। सीढ़ीनुमा आकृतियां से जब फव्वारे का पानी नीचे की तरफ आने लगता है तो इसकी चमक और भी बढ़ जाती है। एनडीएमसी ने विशेषज्ञों ने इसे मूर्त रूप दिया।
पानी की नहीं होगी बर्बादी, बना सेल्फी पॉइंट
फव्वारे के लिए टर्शरी वाटर का प्रयोग किया जाता है। इसके शोधन के लिए यहां उपकरण भी लगाए गए हैं। पानी की बर्बादी किए बगैर इसे जीवंत रूप देने के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। खूबसूरती की वजह से फव्वारा और आसपास के क्षेत्र लोगों के लिए सेल्फी पॉइंट बनने लगे हैं।