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दिल्ली: जेड प्लस सुरक्षा हटाने पर हाईकोर्ट पहुंचे स्वामी चक्रपाणी, अदालत ने पुलिस से मांगा जवाब

Wed, 29 Sep 2021 08:15 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

स्वामी चक्रपाणी ने याचिका में कहा कि 23 सितंबर को उनकी जेड सुरक्षा को वापस लेने संबंधी केंद्र और पुलिस का निर्णय मनमाना है। जेड सुरक्षा को एक्स सुरक्षा में डाउनग्रेड करने का निर्णय कुछ राजनीतिक प्रतिशोध के कारण राजनीति से प्रेरित हो सकता है
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विस्तार
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दिल्ली हाईकोर्ट ने हिंदू संत महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि द्वारा अपनी जेड सुरक्षा कवर को बहाल करने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। स्वामी चक्रपाणि ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उन्हें दाऊद इब्राहिम के सहयोगियों, छोटा शकील और अन्य असामाजिक और राष्ट्र विरोधी तत्वों के हमले का खतरा है।
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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए वकील को अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई की तारीख छह अक्तूबर तय की है। चक्रपाणि ने आरोप लगाया कि उन्हें मिली धमकियों के आलोक में दिल्ली पुलिस व अन्य संबंधित अथारिटी ने जेड प्लस सुरक्षा कवर बनाए रखने के उनके आवेदन पर कोई कदम नहीं उठाया।

याचिका में कहा कि 23 सितंबर को उनकी जेड सुरक्षा को वापस लेने संबंधी केंद्र और पुलिस का निर्णय मनमाना है। उन्होंने कहा कि जेड सुरक्षा को एक्स सुरक्षा में डाउनग्रेड करने का निर्णय कुछ राजनीतिक प्रतिशोध के कारण राजनीति से प्रेरित हो सकता है, क्योंकि याचिकाकर्ता बड़े पैमाने पर समाज और विशेष रूप से हिंदू धर्म के विभिन्न मुद्दों पर मुखर रहे हैं।
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याचिका में यह भी कहा गया कि जेड सुरक्षा वापस लेने के कारण याचिकाकर्ता के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन किया गया, क्योंकि उन्हें बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और भारत के पूरे क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से घूमने की स्वतंत्रता से वंचित किया गया। साथ ही वह आतंकवादी हमले के लिए आसान शिकार बन गए हैं।

याचिका में आगे कहा गया कि केंद्र व पुलिस के आचरण से यह स्पष्ट है कि वे चाहते हैं कि याचिकाकर्ता को वैश्विक आतंकवादियों दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील और उनके गुर्गे और अन्य राष्ट्र-विरोधी और असामाजिक तत्वों के हाथों समाप्त कर दिया जाए। याचिकाकर्ता को भाषण और आंदोलन की स्वतंत्रता के साथ-साथ भारत के संविधान में निहित जीवन और स्वतंत्रता के अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने से रोका जा रहा है।
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