कारोबारियों से उगाही व जालसाजी के मामले में रोहिणी जेल से गिरफ्तार शातिर सुकेश चंद्रशेखर एक वर्ष से तिहाड़ व रोहिणी जेल में दो मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा था। उसके पास एक दिल्ली का एयरटेल का मोबाइल नंबर था। उसके पास से एक एप्पल का आईफोन व दूसरा सैमसंग का साधारण फोन बरामद हुआ है।
आरोपी अपने मोबाइल नंबर से आए दिन सैंकड़ों फोन करता था। बाजवूद जेल अधिकारियों की उस पर नजर नहीं पड़ी। स्पेशल सेल की जांच में ये बात सामने आई है। अब मामला स्पेशल सेल से आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंप दिया गया है। ईओडब्ल्यू ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि तिहाड़ में आरोपी के पास मोबाइल हैंडसैट कैसे चले गए। पुलिस इससे मिलने वालों की सूची खंगाल रही है। स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि वह जेल में बैठकर आरोपियों से उगाही करने में लगा हुआ था। वह ऐसे कारोबारियों को अपना निशाना बनाता था, जिनके खिलाफ पहले से मामले हैं। ये केस को खत्म करवाने की बात कहकर उसने पैसे ऐंठ रहा था।
जो पैसे नहीं देता था, उन्हें फंसाने की धमकी देकर पैसे ऐंठता था। उन्हें कहता था कि जिनके केस की तेजी से जांच करवाएगा। आरोपी करीब 200 करोड़ रुपये ऐंठ चुका है। पुलिस अधिकारी मान रहे हैं कि आरोपी काफी लोगों से पैसे ऐंठ चुका है। ईओडब्ल्यू इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने कारोबारियों से पैसे और किस बैंक खाते में लिए।
स्पूफ कॉलिग के जरिए फोन कर कर रहा था उगाही
आरोपी सुकेश चद्रंशेखर पीड़ित को स्पूफ कॉलिंग करता था। ये ऐप आधारित एक तकनीक है। इसमें आरोपी पीड़ित को अपने नंबर से फोन करता है, मगर पीड़ित के पास गृहमंत्रालय या किसी आईएएस या फिर आईपीएस का नंबर शो होता था। इससे पीड़ित को लगता था कि आरोपी सही बोल रहा है। इस कारण लोग इसके झांसे में आ जाते थे। इस वचुर्अल कालिंग भी बोलते हैं।
आरोपी ने जेल के बाहर एक नेटवर्क बना रखा था
स्पेशल सेल के पुलिस अधिकारियों के अनुसार सुकेश ने जेल के बाहर एक नेटवर्क बना रखा था। इस नेटवर्क के तहत एक टीम बनी हुई थी। इस टीम में आधा दर्जन से ज्यादा सदस्य थे। ये टीम पीड़ित के नंबर का इंतजाम करने, जालसाजी में इस्तेमाल किए जाने वाले ब्यूरोक्रेट का नंबर व पीड़ित से पैसे लेने आदि का काम करता था।
ये पीड़ित को गृहमंत्रालय या ब्यूरोक्रेट के नंबर दिखाते थे
पुलिस अधिकारियों के अनुसार ये पीड़ित को डराने के लिए स्पूफ कॉलिंग में गृहमंत्रालय या फिर वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट के नंबर का इस्तेमाल करते थे। अभी तक की जांच में करीब चार से ज्यादा पीड़ितों के नाम सामने आ चुके हैं। सुकेश के खिलाफ पहले से जालसाजी आदि के सात से आठ मामले दर्ज हैं।