कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली मेट्रो परिसर में चलने वाली दुकानों को भी करोड़ों का नुकसान हो चुका है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर के कारण मेट्रो सेवाएं छह महीने से अधिक दिनों तक बंद रहीं। करीब 20 फीसदी दुकानें अभी भी बंद हैं, जबकि कुछ खुलने वाली दुकानदारों को किराये के बराबर भी कमाई नहीं होने की वजह से दोबारा कारोबार शुरू करने से कतरा रहे हैं।
कोरोना की पहली लहर के दौरान लंबे समय तक मेट्रो परिसर की दुकानें बंद रहीं। ग्राहकों के न होने की वजह से कारोबार ठप हो गया। सितंबर, 2020 में दोबारा मेट्रो का परिचालन शुरू होने पर दुकानें खुलने लगीं। बड़े आउटलेट्स अभी भी बंद हैं और अगर खुली हैं तो ग्राहकों की कम संख्या होने की वजह से मुनाफा नहीं हो रहा है। दुकानदारों की मांग पर डीएमआरसी ने लाइसेंस फीस में कारोबारियों को लाइसेंस फीस में थोड़ी राहत दी। इसके बाद भी बड़े अधिकतर दुकानदारों का कारोबार पटरी पर नहीं लौट सका है। कुछ दुकानें खुलीं तो कोरोना की दूसरी लहर से हालात और भी बिगड़ गए।
मेट्रो स्टेशनों पर कियॉस्क चलाने वालों का कहना है कि मेट्रो सेवाएं शुरू होने पर भी कारोबार घटकर 10 फीसदी तक बचा है। ऐसे में डीएमआरसी को किराया चुकाना भी मुश्किल हो गया है। दुकानदार दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन से लगातार वित्तीय राहत देने की मांग कर रही हैं, ताकि कारोबार को दोबारा पटरी पर लौटने का मौका मिल सके। इस दौरान बंद हुई दुकानों को दोबारा नए सिरे से शुरू करने के लिए विकल्पों की तलाश में हैं। दिल्ली मेट्रो को भी लॉकडाउन में सेवाएं बंद होने की वजह से रोजाना करीब 10 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा।
लाइसेंस फीस बढ़ने से बढ़ी परेशानी
मेट्रो स्टेशनों पर फूड कोर्ट पर ग्राहकों की अधिक भीड़ होती थी। कोरोना संक्रमण काल में सेवाएं शुरू होने पर भी बाहर खाने से अधिकतर लोग बचने लगे हैं। इस वजह से भी कारोबार न के बराबर रह गया है। इस बीच लाइसेंस फीस में भी 20 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी कर दी गई। ऐसे में दुकानें बंद कर, सरेंडर की जाने लगी।