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किसानों संगठनों की बैठक में फैसला: पीएम को लिखेंगे खुला पत्र, एमएसपी और टेनी की बर्खास्तगी की होगी शर्त

Sun, 21 Nov 2021 02:36 PM IST
शाहरुख खान एएनआई, नई दिल्ली

सार

बैठक के बाद किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा, ''हमने कृषि कानूनों के खत्म करने पर चर्चा की। इसके बाद कुछ निर्णय लिए गए। संयुक्त किसान मोर्चा का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम योजना के अनुसार रहेगा। 
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संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल - फोटो : ANI
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विस्तार
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संयुक्त किसान मोर्चा की सिंघु बॉर्डर (दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर) पर बैठक संपन्न हो गई है। बैठक में निर्णय लिया गया है कि पूर्व निर्धारित सभी कार्यक्रम समय पर होंगे और उनमें कोई बदलाव नहीं होगा। लंबित मांगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखा जाएगा। इस संबंध में एसकेएम की अगली बैठक 27 नवंबर को होगी।
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प्रधानमंत्री के निर्णय पर राजेवाल ने कहा, यह अच्छा कदम है। हम इसका स्वागत करते हैं। लेकिन अभी कई चीजें अभी बाकी हैं। हम प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखेंगे। उन्होंने कहा कि पत्र में एमएसपी कामेटी, उसके अधिकार, उसका समय काल, उसके कर्तव्य, बिजली बिल 2020, केस वापस लेने आदि मुद्दों का उल्लेख होगा। हम लखीमपुर मुद्दे पर मंत्री (अजय मिश्र टेनी) को बर्खास्त करने पर भी लिखेंगे।

बैठक के बाद किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा, ''हमने कृषि कानूनों के खत्म करने पर चर्चा की। इसके बाद कुछ निर्णय लिए गए। संयुक्त किसान मोर्चा का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम योजना के अनुसार रहेगा। 22 को लखनऊ में किसान पंचायत, 26 को सभी बॉर्डरों पर किसानों का घेराव और 29 को संसद तक मार्च। अन्य मांगों को लेकर पीएम को खुला पत्र लिखा जाएगा।'' उन्होंने कहा, ''आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेने के लिए एसकेएम की एक और बैठक 27 नवंबर को होगी। तब उस समय की स्थिति के अनुसार निर्णय लिए जाएंगे।''
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इससे पहले गाज़ीपुर बॉर्डर पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि मैं लखनऊ जा रहा हूं, 22 तारीख को लखनऊ में महापंचायत है। कृषि क़ानून वापस हुए है। हमारे सारे मुद्दों में से केवल एक मुद्दा कम हुआ है, बचे हुए मुद्दे अभी बाकी है। किसानों पर दर्ज़ मुकदमें और जिन किसानों की मृत्यु हुई ये मुद्दे महत्वपूर्ण हैं।

आंदोलन खत्म होने के फैलाए जा रहे भ्रम में न फंसें किसान : राकेश टिकैत
इससे पहले, शनिवार को तीन कृषि कानूनों पर रार खत्म होने के बाद अब किसान नेता राकेश टिकैत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गारंटी कानून, बिजली अमेंडमेंट बिल और अन्य मामलों पर डट गए हैं। उन्होंने 22 को लखनऊ में होने वाली पंचायत के असमंजस को भी खत्म कर दिया। किसानों से आह्वान किया कि कोई भी सरकार के भम्र में न रहे क्योंकि किसान आंदोलन खत्म करने को लेकर तेजी से भम्र फैलाया जा रहा है।

29 नवंबर को संसद तक ट्रैक्टर मार्च
एक किसान नेता ने बताया कि दिल्ली बॉर्डर से अभी किसान आंदोलन खत्म नहीं होगा। हमारे पहले से जो कार्यक्रम तय थे, वे अब तय तारीख पर आयोजित होंगे। हम 22 नवंबर को लखनऊ में किसानों की बड़ी रैली होनी है। जबकि 26 नवंबर को किसान आंदोलन का एक साल पूरा होने पर देशभर में रैली निकालेंगे। इसके साथ ही 29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद सत्र के दौरान प्रतिदिन 500 प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर ट्रॉलियों में सवार होकर संसद तक शांतिपूर्ण मार्च करेंगे।
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मुआवजा और किसानों की याद में स्मारक बने
संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से जारी आंकड़े के मुताबिक किसान आंदोलन में अब तक 670 से अधिक किसान जान गंवा चुके हैं। सरकार की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि देना तो दूर उनके बलिदान को भी नहीं स्वीकार किया गया। आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों को मुआवजा देने, आश्रितों को रोजगार देने सहित उन किसानों के नाम पर एक स्मारक बनवाने की मांग की है।

किसानों पर दर्ज झूठे मामले बगैर शर्त हो वापस
हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, चंडीगढ़, मध्यप्रदेश सहित दूसरे राज्यों में हजारों किसानों को झूठे मामलों में फंसाया गया है। मोर्चा ने उनपर दर्ज मामले रदद् करने की मांग की है। परिवारों को मुआवजे और रोजगार के अवसरों के साथ समर्थन दिया जाना है। शहीदों को भी संसद सत्र में श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए और उनके नाम पर एक स्मारक बनाया जाना चाहिए। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, चंडीगढ़, मध्यप्रदेश आदि विभिन्न राज्यों में हजारों किसानों के खिलाफ सैकड़ों झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं। सभी मामले बगैर शर्त वापस लेने की भी किसानों ने मांग की है।
 
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