केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसका उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार सबका साथ सबका विकास के उद्देश्य से काम कर रही है। राष्ट्र के निर्माण में दिव्यांग जनों का भी समुचित सम्मान और उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो रही है।
साहित्य अकादमी ने पहली बार अखिल भारतीय दिव्यांग लेखक सम्मेलन का आयोजन कराया। केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसका उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार सबका साथ सबका विकास के उद्देश्य से काम कर रही है। राष्ट्र के निर्माण में दिव्यांग जनों का भी समुचित सम्मान और उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो रही है। इस तरह के सम्मेलन इन सबको एक मंच प्रदान करने के लिए श्रेष्ठ कदम साबित होंगे।
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अर्जुन राम मेघवाल ने कई दिव्यांग साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे अपने जीवन में कुछ रंगों की कमी की चिंता न करते हुए रंगों का एक दूसरा इंद्रधनुष तैयार कर लेते हैं, जो हम सबके जीवन में एक नया उजाला भर देता है।
अंग्रेजी लेखिका के श्रीलता ने दिव्यांग लोगों के सामने आने वाली मुश्किलों को साझा करते हुए कहा कि हमें दिव्यांगों के प्रति अपना नजरिया बदलना होगा। अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने कहा कि आने वाले समय में इस तरह के विशेष सम्मेलन के स्थान पर सबको एक ही मंच पर लाया जाएगा।
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इस दौरान कविता व कहानी पाठ किया गया। इसमें विनोद आसुदानी, सुरभि चटर्जी (बांग्ला), साहिसुली ब्रह्म (बोडो), कुसुमलता मलिक (हिंदी), नितिन वी मेहता (गुजराती), एस रघुनाथ (कन्नड), रिलिन गेम्मा लिंगदोह (खासी), सुखबीर मोहबत (पंजाबी), मोहम्मद असलम बद्र (उर्दू) समेत दर्जनों लेखकों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।