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खुलासा: दिल्ली के इन चार अस्पतालों में हर महीने 70 बच्चों की हुई मौत, कम वजन के कारण अधिकतर मासूमों ने तोड़ा दम

Sun, 06 Mar 2022 08:32 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

आरटीआई में जानकारी मिली है कि जनवरी 2015 से जुलाई 2021 के बीच एम्स, सफदरजंग, लेडी हार्डिंग और सुचेता कृपलानी अस्पताल में 3.46 लाख से भी अधिक शिशुओं का जन्म हुआ है, जिनमें 5724 की मौत हुई। जबकि सफदरजंग अस्पताल में हर माह तकरीबन 50 नवजातों की जिंदगी चली गई।
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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दिल्ली के चार बड़े अस्पताल में हर माह 70 बच्चों की मौत हुई है। इन बच्चों की आयु 10 वर्ष या उससे कम थी। इनमें अधिकांश नवजात शिशु हैं। राजधानी के चार बड़े एम्स, सफदरजंग, लेडी हार्डिंग और सुचेता कृपलानी अस्पताल में बीते छह वर्षों के दौरान हुई शिशुओं की मौत को लेकर दायर आरटीआई में जानकारी मिली है कि जनवरी 2015 से जुलाई 2021 के बीच इन अस्पतालों में 3.46 लाख से भी अधिक शिशुओं का जन्म हुआ है, जिनमें 5724 की मौत हुई। जबकि सफदरजंग अस्पताल में हर माह तकरीबन 50 नवजातों की जिंदगी चली गई।

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आरएमएल अस्पताल से नहीं दी गई कोई जानकारी 
सफदरजंग और सुचेता कृपलानी अस्पतालों ने सितंबर 2021 तक की जानकारी दी है। सफदरजंग अस्पताल में 1.68 लाख शिशु का जन्म हुआ है जिनमें से 4085 बच्चों की मौत हुई। वहीं आरएमएल अस्पताल की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई। इनके अलावा एम्स में जनवरी 2015 से जुलाई 2021 के बीच 15354 शिशुओं का जन्म हुआ जिनमें से 173 की मौत हुई। 

इसी तरह कलावती अस्पताल में 1,199 बच्चों की मौत हुई जबकि अस्पताल में इस अवधि के दौरान 80,959 बच्चे पैदा हुए। सुचेता कृपलानी अस्पताल में 81,611 बच्चे पैदा हुए जिनमें से 267 की जन्म के बाद मृत्यु हो गई। इन आंकड़ों की गणना करने पर प्रति हजार बच्चों पर शिशु मृत्यु दर 16.5 आती है। 
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मौतों के ये रहे मुख्य कारण
नमूना पंजीकरण सर्वेक्षण (एसआरएस) के अक्तूबर 2021 में जारी बुलेटिन के मुताबिक, 2019 में दिल्ली में प्रति हजार बच्चों पर शिशु मृत्यु दर 11 थी। अस्पतालों ने जानकारी दी है कि समय से पहले जन्म के कारण दम घुटना, सेप्टीसीमिया, सांस लेने में परेशानी और बच्चे के कम वजन के कारण उत्पन्न जटलिताएं बच्चों की मौत का मुख्य कारण हैं।  

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