पिछले 21 साल से संसद भवन में मंत्रियों से लेकर संतरियों तक को पत्र पहुंचाने वाले राम शरण मंगलवार को सेवनिवृत्त हो गए। सेवानिवृत्ति के मौके पर गोल मार्केट स्थित डाकघर में पुराने सहयोगियों ने उनका जोरदार स्वागत किया। नोटों की माला पहनाकर मंच पर बिठाया। सबने कुछ न कुछ भेंट किया और भविष्य में मिलते रहने का आश्वाशन दिया। एक-एक कर सभी साथियों ने राम शरण की कर्तव्यनिष्ठा की मिशाल पेश की।
राम शरण अपने सहयोगियों और बाकी लोगों से इतना सम्मान पाकर बेहद खुश और भावुक थे। उन्होंने कहा कि वह इसलिए ज्यादा खुश हैं कि लोग उनके काम की वजह से आज उन्हें सम्मान की निगाह से देख रहे हैं। राम शरण फरीदाबाद एनटीपीसी के पास स्थित नीम का गांव के रहने वाले हैं। वह पिछले 41 साल से रोजाना फरीदाबाद से दिल्ली ठीक समय पर आकर ड्यूटी करते रहे। शुक्रवार को संसद भवन में अंतिम पत्र पहुंचाने के बाद वह मंगलवार को सेवामुक्त हो गए।
काम को ही प्राथमिकता दी
राम शरण ने 7 अगस्त 1980 को दिल्ली में रेल मेल सर्विस (आरएमएस) ज्वाइन किया था। बाद में भारतीय डाक विभाग में भर्ती निकली तो यहां आदेवदन किया। 9 फरवरी 1989 को भारतीय डाक विभाग ज्वाइन कर लिया। मंडी हाउस, फिरोजशाह रोड पर डाकिया के रूप में पहली पोस्टिंग मिली। नई दिल्ली क्षेत्र में ही कई जगहों पर स्थानांतरित हुए। गोल मार्केट डाकघर में पोस्टिंग के बाद से पिछले 21 साल से संसद भवन में पत्र पहुंचाने की ड्यूटी इन्हीं की रही।
कभी किसी से सिफारिश नहीं की
राम शरण फरीदाबाद के गांव में रहते हैं। 2 बेटियां, 5 बेटे कुल 7 बच्चे और परिवार के अन्य सदस्यों का खर्चा उठाते रहे। बच्चों को पढ़ाया-लिखाया और विवाह कराया। इस बीच हमेशा आर्थिक तंगी झेली, लेकिन कभी किसी मंत्री-संतरी से एक पैसे की मदद नहीं मांगी। यहां तक की बच्चों की नौकरी के लिए भी किसी से सिफारिश नहीं की। उनकी इन्हीं आदतों की वजह से उनके विभाग ने 21 साल तक उनकी ड्यूटी संसद भवन में लगाए रखी।
सरकारी जिम्मेदारी को रखा ऊपर
राम शरण ने अपने सेवाकाल के दौरान कई प्रधानमंत्री और मंत्री बदलते देखे। लेकिन भारत सरकार के डाक विभाग ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी, उन्होंने उस जिम्मेदारी को ही सबसे ऊपर रखा।