अदालत ने उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में तालमेल की कमी और उनके भ्रमित आचरण को लेकर एक एसएचओ सहित दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को फटकार लगाई है। कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने पुलिस अधिकारियों और अभियोजन पक्ष के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने और दंगों के मामले में प्रभावी अभियोजन के लिए आदेश की प्रति विशेष पुलिस आयुक्त को भेजने का निर्देश दिया है।
अभियोजन पक्ष ने मामले को इस आधार पर मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में स्थानांतरित करने का आग्रह किया कि मामले में धारा 436 (आग या विस्फोटक पदार्थ द्वारा घर, आदि को नष्ट करने) लागू नहीं होती। वहीं एसएचओ और दो अन्य पुलिस अधिकारियों ने कोर्ट को अवगत कराया कि विशेष लोक अभियोजक दिनभर उपलब्ध नहीं हैं।
अदालत ने एसएचओ से पूछा कि यह आवेदन आप द्वारा दायर किया गया है, क्या यह एक मजाक है? क्या आरोपी की पुलिस हिरासत एक मजाक है? आप खुद नहीं जानते कि क्या करना है। धारा 436 कब लागू करनी है। अदालत से फटकार खाने के बाद पुलिस ने बताया कि वह अर्जी वापस लेना चाहती है।
अदालत ने उनके रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आपने आरोपी की जमानत आवेदन का विरोध किया, आपने आरोपपत्र दायर किया। सबसे पहले आप तीनों अधिकारी तय करते कि क्या करना है। एक घंटे में आपका रुख बदल गया, आपकी समझ अचानक बदल गई।
अदालत ने कहा पुलिस अधिकारी खुद असमंजस में हैं क्योंकि उन्होंने सबसे पहले आवेदन दायर कहा मामले में धारा 436 लागू नहीं होती और फिर तुरंत आवेदन वापस लेने का तर्क रख रहे हैं। यह पुलिस का उचित तरीका नहीं है। उन्होंने मामले को मजिस्ट्रेट कोर्ट में ट्रांसफर करने के लिए दायर आवेदन को खारिज कर दिया।