नई दिल्ली। राजधानी के निजी स्कूलों में ईडब्ल्यूएस (आर्थिक पिछड़ा वर्ग), डीजी (वंचित वर्ग) और दिव्यांग श्रेणी की 25 फीसदी सीटों पर दाखिले का इंतजार खत्म होने जा रहा है। शिक्षा निदेशालय ने इन श्रेणी के बच्चों के नर्सरी, केजी व पहली कक्षा में दाखिले के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निजी स्कूलों में इन कक्षाओं की करीब चालीस हजार सीटों पर दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 22 मार्च से शुरू होगी। आवेदन करने के लिए अभिभावकों को करीब 15 दिन का समय मिलेगा।
ऑनलाइन आवेदन निदेशालय की वेबसाइट के माध्यम से किया जा सकता हैै। सभी श्रेणियों में दाखिले के लिए अभिभावक का तीन वर्ष से दिल्ली का निवासी होना जरूरी है। ईडब्ल्यूएस, वंचित वर्ग व दिव्यांग श्रेणी में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 4 अप्रैल को समाप्त होगी, जबकि पहला कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ 11 अप्रैल को होगा। एक आवेदक से एक ही आवेदन स्वीकार किया जाएगा। यदि कोई आवेदक एक से अधिक आवेदन करता है तो लॉटरी के बाद भी उसका आवेदन रद्द कर दिया जाएगा। मालूम हो कि नर्सरी, केजी व पहली कक्षा में दाखिले के लिए सामान्य श्रेणी की 75 फीसदी सीटों पर दाखिला प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अब स्कूल सीट बचने पर ही 15 मार्च तक तीसरी सूची जारी करेंगे।
आवेदन प्रक्रिया के तहत एक लाख वार्षिक आय से कम वाले ईडब्ल्यूएस के बच्चे, डीजी श्रेणी के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग (नॉन क्रीमी लेयर) अनाथ, ट्रांसजेंडर व एचआईवी प्रभावित बच्चों की 22 फीसदी सीटों पर दाखिला ले सकते हैं। वहीं अन्य तीन फीसदी सीटें दिव्यांग श्रेणी के छात्रों के लिए हैं।
आयु सीमा निर्धारित
शिक्षा निदेशालय ने दिशा-निर्देशों में आयु सीमा भी निर्धारित की है। ईडब्ल्यूएस व वंचित वर्ग केे लिए प्री स्कूल यानी नर्सरी के लिए 3 से 5 वर्ष, प्री प्राइमरी यानी केजी के लिए 4 से 6 वर्ष और पहली कक्षा के लिए 5 से 7 वर्ष आयु सीमा तय की गई है, जबकि दिव्यांग श्रेणी के लिए नर्सरी में दाखिले की आयुु सीमा 3-9 वर्ष, केजी में 4-9 वर्ष व पहली कक्षा में दाखिले के लिए आयु सीमा 5-9 वर्ष तय की गई है।
जरूरी दस्तावेज
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित वर्ग के तहत दाखिला लेने के लिए राजस्व विभाग का आय प्रमाणपत्र, बीपीएल राशन कार्ड जरूरी है। वहीं एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग, अनाथ, ट्रांसजेंडर और एचआईवी प्रभावित बच्चों को वंचित वर्ग में शामिल किया गया है। दिव्यांग श्रेेेणी के लिए दस्तावेज के रूप में किसी सरकारी अस्पताल का दिव्यांगता प्रमाणपत्र जरूरी है।