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दिल्ली: जिला अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे, अब वकीलों की भी जांच जरूरी

Sun, 26 Sep 2021 04:34 AM IST
प्राची प्रियम विजय सिंघल, नई दिल्ली

सार

वकीलों की तलाशी के विरोध का अपराधी आसानी से फायदा उठाते हैं। अब वकीलों को भी यह एहसास होने लगा है कि कोर्ट को सुरक्षित बनाने के लिए उनकी भी जांच जरूरी है।
 
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Rohini Court
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विस्तार
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राजधानी की जिला अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे है। इन अदालतों में लगे मेटल डिटेक्टर या तो काम नहीं कर रहे या फिर उन पर तैनात पुलिसकर्मी आने-जाने वालों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। इसका एक मुख्य कारण तलाशी पर वकीलों की आपत्ति भी है। इसके अलावा कोर्ट परिसर में आने वाली कारों की तलाशी का कोई प्रावधान न होने के चलते भी अपराधी आसानी से कोर्ट में घुस जाते हैं। अब वकीलों को भी यह एहसास होने लगा है कि कोर्ट को सुरक्षित बनाने के लिए उनकी भी जांच जरूरी है।
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राजधानी में जिला अदालतों में सबसे ज्यादा सुरक्षा की खराब हालत तीस हजारी व पटियाला हाउस कोर्ट की है। तीस हजारी कोर्ट में जाने के इतने अधिक रास्ते हैं कि कोई भी आसानी से आ-जा सकता है। इसके अलावा मेट्रो से आने-जाने वाले भी बाहर निकलने के लिए तीस हजारी अदालत परिसर का ही उपयोग करते हैं।

यही स्थिति पटियाला हाउस कोर्ट की है। कुल 11 गेट हैं लेकिन एक गेट को छोड़ कर किसी भी अन्य गेट पर सुरक्षा जांच की उचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे में आम लोगों के अलावा अपराधियों पर नजर रखना संभव नहीं है।
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द्वारका, साकेत, रोहिणी व कडकड़ढूमा अदालत परिसर में हालांकि आना-जाना आसान नहीं है लेकिन कार के जरिए आप आसानी से अदालत परिसर में जा सकते हैं। एक बार यदि कार के जरिए आप अंदर आ गए तो कोर्ट रूम में पहुंचना मुश्किल नहीं है।

अदालत की सुरक्षा में तैनात एक निरीक्षक ने बताया कि रोहिणी में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से सख्त है, लेकिन अपराधी यदि वकील की ड्रेस में आ जाए तो इसे सुरक्षा की लापरवाही नहीं माना जा सकता। हम भी मजबूर हैं क्योंकि वकीलों की जांच करने पर वे धमकाते हैं और यदि ज्यादा हंगामा होता है तो हड़ताल तक की नौबत आ जाती है। हमें भी उच्च अधिकारियों का निर्देश है कि ज्यादा बहस न करें।

पटियाला हाउस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके वाधवा ने माना कि वकीलों की जांच में परेशानी आती है, लेकिन सभी की जान का सवाल है। कल जिस प्रकार की घटना हुई उसमें वकील व जज की भी जान जा सकती थी। हम अदालत में आने वाले हर वकील की भी जांच की मांग करते हैं और सभी वकीलों से भी आग्रह है कि वे पुलिस को जांच में सहयोग करें।
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तीस हजारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव नसियार ने कहा कि सुरक्षा एक अहम मुद्दा है। अपराधियों का पता है कि वकील की ड्रेस में वे आसानी से अदालत में जा सकते हैं और इसी का फायदा उठाकर वारदात को अंजाम दिया गया। सभी वकीलों को अब इस बात को समझना होगा और कोर्ट रुम में जाने वाले आम लोगों के अलावा वकीलों को भी जांच में सहयोग करना चाहिए ताकि अदालत परिसर को सुरक्षित बनाया जा सके।

गैंगस्टरों के मामले में सुनवाई के लिए बने विशेष कोर्ट
दिल्ली बार काउंसिल के चेयरमैन रमेश गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के रिहायशी इलाकों में कोर्ट परिसर बनाना ही गलत है। आम तौर पर देखने में आया है कि अदालत परिसर में जितनी भी बड़ी घटनाएं हुई हैं वे गैगस्टरों के मामलों में हुई हैं। उन्होंने सुझाव दिया था कि गैंगस्टरों के मामलों के लिए अलग विशेष कोर्ट बनाई जाए और वहां कड़ी सुरक्षा करना संभव होगा।

अधिवक्ता गुप्ता ने कहा कि इनमें कोई संदेह नहीं है कि हादसे होते हैं, कमेटी बनती है और कुछ ही दिनों में सभी घटना को भूल जाते है इस मामले के बाद भी ऐसा ही होगा। सिस्टम ही ऐसा है कि अपराधी अस्पताल में डॉक्टर की और अन्य स्थानों पर पुलिस की वर्दी पहनकर अपराध को अंजाम देते हैं। उन्होंने कहा कि मामले में सुरक्षा लापरवाही नहीं है यदि ऐसा होता को अपराधी भाग जाते, लेकिन पुलिस ने एनकांटर में मार गिराया। 

अधिवक्ता गुप्ता ने कहा कि सिस्टम में सुधार करना होगा। अदालत 10 बजे शुरु होती है और अधिकांश लोगों को पौने दस बजे एंट्री दी जाती है। वहीं वकील भी करीब इसी समय पंहुचते हैं। मामलों की सुनवाई के लिए आने वाले लोगों के पहले से जांच कर अंदर जाने की इजाजत दी जानी चाहिए। ऐसा न होने से पुलिसकर्मीयों पर जांच का दवाब बढ़ता है और वे सही ढंग से जांच नहीं कर पाते।
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