तीस हजारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव नसियार ने कहा कि सुरक्षा एक अहम मुद्दा है। अपराधियों का पता है कि वकील की ड्रेस में वे आसानी से अदालत में जा सकते हैं और इसी का फायदा उठाकर वारदात को अंजाम दिया गया। सभी वकीलों को अब इस बात को समझना होगा और कोर्ट रुम में जाने वाले आम लोगों के अलावा वकीलों को भी जांच में सहयोग करना चाहिए ताकि अदालत परिसर को सुरक्षित बनाया जा सके।
गैंगस्टरों के मामले में सुनवाई के लिए बने विशेष कोर्ट
दिल्ली बार काउंसिल के चेयरमैन रमेश गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के रिहायशी इलाकों में कोर्ट परिसर बनाना ही गलत है। आम तौर पर देखने में आया है कि अदालत परिसर में जितनी भी बड़ी घटनाएं हुई हैं वे गैगस्टरों के मामलों में हुई हैं। उन्होंने सुझाव दिया था कि गैंगस्टरों के मामलों के लिए अलग विशेष कोर्ट बनाई जाए और वहां कड़ी सुरक्षा करना संभव होगा।
अधिवक्ता गुप्ता ने कहा कि इनमें कोई संदेह नहीं है कि हादसे होते हैं, कमेटी बनती है और कुछ ही दिनों में सभी घटना को भूल जाते है इस मामले के बाद भी ऐसा ही होगा। सिस्टम ही ऐसा है कि अपराधी अस्पताल में डॉक्टर की और अन्य स्थानों पर पुलिस की वर्दी पहनकर अपराध को अंजाम देते हैं। उन्होंने कहा कि मामले में सुरक्षा लापरवाही नहीं है यदि ऐसा होता को अपराधी भाग जाते, लेकिन पुलिस ने एनकांटर में मार गिराया।
अधिवक्ता गुप्ता ने कहा कि सिस्टम में सुधार करना होगा। अदालत 10 बजे शुरु होती है और अधिकांश लोगों को पौने दस बजे एंट्री दी जाती है। वहीं वकील भी करीब इसी समय पंहुचते हैं। मामलों की सुनवाई के लिए आने वाले लोगों के पहले से जांच कर अंदर जाने की इजाजत दी जानी चाहिए। ऐसा न होने से पुलिसकर्मीयों पर जांच का दवाब बढ़ता है और वे सही ढंग से जांच नहीं कर पाते।