'देखो-देखो, भोला भाग गया' जी हां उत्तर भारत का बड़ा ड्रग तस्कर तैमूर उर्फ भोला ने आसपास के 15 से 20 गांव में अपनी ऐसी इमेज बनाई हुई थी कि लोग उसे भगवान मानने लगे थे। भोला हर सुख-दुख में लाखों-लाखों रुपये देकर ग्रामीणों की मदद करता रहता था। यही वजह है कि दिल्ली, हरियाणा नंबर व पुलिस की गाड़ियां देखते गांव के बच्चे खेल-खेल में शोर मचाने लगते थे कि देखो-देखो भोला भाग गया।
ग्रामीणों का साथ मिलने का ही नतीजा था कि भोला पिछले करीब 9 साल से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था। उसकी गिरफ्तारी से दिल्ली यूपी के नौ मामले सुलझे हैं। इसके खिलाफ नशे का धंधा करने के अलावा यूपी में गुंडा एक्ट के तहत भी मामला दर्ज है। दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक अब भोला के खिलाफ मकोका का मामला दर्ज किया जा सकता है। फिलहाल इस पर विचार किया जा रहा है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बेहड़ा, फरीदपुर, बरेली के किसान परिवार में पैदा हुआ तैमूर पढ़ने लिखने में अच्छा छात्र रहा। उसने बरेली विश्वविद्यालय से बीए किया। इसके बाद उसने बरेली के ही फ्यूचर कॉलेज में एमबीए में दाखिला ले लिया। वह पढ़ाई पूरी कर विदेश जाने का सपना देखने लगा। लेकिन उसके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। ऐसे में उसे पढ़ाई ही बीच में छोड़नी पड़ी।
इस दौरान उसकी मुलाकात 2007 में गांव के ही एक बड़े हेरोइन तस्कर से हुई। उसके कहने पर तैमूर ने हेरोइन बरेली से दिल्ली ले जाने लगा। हर ट्रिप पर उसे 1600 रुपये मिलते थे। लेकिन वष 2008 में वेलकम से दिल्ली पुलिस ने उसे दबोच लिया। सात माह जेल में रहने के बाद उसने दोबारा इसी धंधे को शुरू कर दिया। वह पुलिस की वजह से कभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था। इसके बाद उसने अपने ही गांव के आशिक खान उर्फ आशिक प्रधान व शाहिद खान उर्फ छोटे खान उर्फ छोटे प्रधान से माल लेने लगा। आशिक को स्पेशल सेल और छोटे को यूपी पुलिस ने दबोच लिया।