अदालत ने कहा कि एक सख्त कानून जिसमें "व्यक्तिगत उपस्थिति" को अनिवार्य माना गया है, उसके कारण हम वर्तमान समय में नागरिकों को अपने अधिकारों का प्रयोग करने से नहीं रोक सकते।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने शनिवार को कहा कि विवाह पंजीकरण का काम मुवक्किलों की वर्चुअल मौजूदगी में भी किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि एक सख्त कानून जिसमें "व्यक्तिगत उपस्थिति" को अनिवार्य माना गया है, उसके कारण हम वर्तमान समय में नागरिकों को अपने अधिकारों का प्रयोग करने से नहीं रोक सकते।
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अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय जोड़े के विवाह पंजीकरण संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा कि शारीरिक रूप से उपस्थिति को अनिवार्य न रखने पर लोगों के लिए विवाह पंजीकरण कराने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी। मालूम हो कि उक्त भारतीय जोड़े ने अपनी याचिका में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराकर विवाह पजिकृत करने की गुहार लगाई है।