देशभर के सैकड़ों लोगों को नामी बैंक, एयरलाइंस और कंपनियों में नौकरी दिलवाने का झांसा देकर ठगी करने वाले एक गैंग का दक्षिण जिला की साइबर सेल ने भांडाफोड़ किया है। आरोपी दक्षिण दिल्ली के नेबसराय स्थित देवली में फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे। पुलिस ने छापेमारी कर कॉल सेंटर से वहां के मैनेजर, एक महिला व 11 युवतियों समेत कुल 13 को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने इनके पास से 19 मोबाइल फोन, 14 रजिस्टर व ढेरों दस्तावेज बरामद हुए हैं। आरोपी बेरोजगारों को नौकरी दिलवाने का झांसा देकर शुरूआत में उनसे प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर 2000 रुपये लेते थे। इसके बाद पीड़ितों को झांसा देकर दूसरे मदों में रुपये एंठ लिये जाते थे। बाद में आरोपी अपने-अपने मोबाइल बंद कर लिया करते थे। आशंका व्यक्त की जा रही है कि इन लोगों ने देशभर के सैकड़ों लोगों से ठगी की है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त अतुल कुमार ठाकुर ने बताया कि पिछले दिनों उनकी टीम को शिकायत मिली थी कि कुछ लोग नौकरी दिलवाने के नाम पर ठगी कर रहे हैं। नेबसराय पुलिस के अलावा जिले की साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू की। टेक्नीकल सर्विलांस के आधार पर पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने दक्षिण दिल्ली के नेबसराय, देवली स्थित राजू पार्क में कॉल सेंटर बनाया हुआ है।
पुलिस ने बृहस्पतिवार को जानकारी जुटाकर ए-166, ग्राउंड फ्लोर, राजू पार्क के मकान में छापेमारी की। वहां पुलिस को 12 टेली कॉलर व इनका एक मैनेजर मिला। पुलिस ने सभी को दबोचा। बाद में इनके खिलाफ नेब सराय थाने में धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान आशीष कुमार, आकांशा, करुणा शर्मा, सुजाथा गुर्जर, शिवानी, नेहा, बर्खा, सोनाली, सलोनी, रिंकी, दीप्ति दास, नेहा, स्नेहा के रूप में हुई है। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
ऐसे की जाती थी ठगी
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि प्रहलादपुर निवासी आशीष कुमार गैंग का सरगना है। वह एक बंटी नामक शख्य के साथ मिलकर फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था। बंटी फिलहाल फरार है, पुलिस की टीमें उसकी तलाश कर रही है। आशीष ने खुलासा किया है कि नौकरी दिलवाने वाली वेबसाइट पर जो बेरोजबार जॉब के लिए अप्लाई करते थे। वहां से उनका डाटा प्राप्त कर लेते थे। इसके बाद अपने कॉल सेंटर में बैठी लड़कियों को उनकी डिटेल दे दी जाती थी। युवतियां कॉल कर शिकार फंसाती थी। रुपयों को ऑन लाइन ट्रांसफर करवा लिया जाता था। सभी लड़कियों को हर माह सैलरी देने के अलावा कुछ कमीशन भी दिया जाता था।