फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लखीमपुर खीरी हिंसा: किसानों की मौत मामले में कांग्रेस का मौन व्रत, गृह राज्य मंत्री से मांगा इस्तीफा

Tue, 12 Oct 2021 12:47 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर कार्यकर्ताओं और नेताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर विरोध जताया। तख्तियों पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ संदेश लिखे थे। 
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में कांग्रेस ने मौन व्रत रख जताया विरोध - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली कांग्रेस ने लखीमपुर खीरी में किसानों की मौत के मामले में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और गृह राज्यमंत्री के इस्तीफ के मांग की है। प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के उप-राज्यपाल निवास के बाहर मौन व्रत रखकर विरोध जताया। 

विज्ञापन


अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर कार्यकर्ताओं और नेताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर विरोध जताया। तख्तियों पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ संदेश लिखे थे। मौन व्रत के दौरान प्रदेश अध्यक्ष के साथ पूर्व केन्द्रीय कानून मंत्री अश्वनी कुमार, पूर्व केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास कृष्णा तीरथ और पूर्व सांसद रमेश कुमार, डॉ. उदितराज सहित पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। 

विरोध के बाद भी आरोपियों को बचाने की हो रही है कोशिश
अनिल कुमार ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी में दिन दहाड़े गृह राज्यमंत्री के बेटे ने किसानों की हत्या कर दी। लगातार हो रहे विरोध के बाद भी उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन ने आरोपियों को बचाने की पुरजोर कोशिश की। बिगड़ती व्यवस्था के कारण सर्वोच्च न्यायालय की ओर से इस मामले में हस्तक्षेप के बाद मंत्री के बेटे को गिरफ्तार किया गया। यह दुर्भाग्यपूर्ण कि इस मामले में उच्च पदों पर सरकार में बैठे नेताओं ने एक शब्द नहीं बोला और बचाने में जुटे हैं। 
विज्ञापन


किसानों का बलिदान नहीं जाएगा बेकार
इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल गृह राज्यमंत्री से इस्तीफा लेकर उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मृत किसानों के परिवारजनों के प्रति संवेदना प्रकट की। कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले 10 महीनों से विरोध जता रहे किसानों के बलिदान को बेकार नहीं जाने देंगे। आंदोलन के दौरान 700 से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें