मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर एक नए दौर का ‘श्रीगणेश’ किया। उन्होंने यमुना तट पर अपनी पत्नी सुनीता के साथ शुद्ध पारंपरिक तरीके से भगवान गणेश जी की पूजा कर मूर्ति स्थापित की। कोरोना के खतरे के कारण दिल्ली में पंडालों में सार्वजनिक कार्यक्रमों की इजाजत नहीं है, ऐसे में मन में श्रद्धा व आदर का भाव संजोए घरों में बैठे दो करोड़ दिल्लीवासी भगवान गणेश का दर्शन कर सकें, इसके लिए दिल्ली सरकार ने अनोखा इंतजाम किया। पूरी दिल्ली इस पूजा का हिस्सा बनी।
दिल्ली सरकार के लाइव गणेश चतुर्थी कार्यक्रम को एक साथ करीब 33 हजार लोगों ने फेसबुक पर देखा। इसके अलावा टीवी चैनलों, दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर भी लोग लाइव पूजा का हिस्सा बने। इस डिजिटल कार्यक्रम को गीतिका गंजू ने प्रस्तुत किया। उन्होंने अपनी मधुर आवाज में दिल्ली की रूपरेखा पेश की। यमुना के तट पर बसे ऐतिहासिक दिल्ली शहर के सौंदर्य को उन्होंने आधुनिकता का रंग लगाकर बड़े ही खूबसूरत अंदाज में प्रस्तुत किया। भव्य पूजन कार्यक्रम का आयोजन सिग्नेचर ब्रिज के पास यमुना किनारे किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत शाम 7 बजे हुई। इसके लिए पंडाल को बहुत ही खूबसूरत तरीके से सजाया गया। पूरा पंडाल लाइट की रोशन से नहाया हुआ था। इस दौरान उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और उनकी पत्नी, कैबिनेट मंत्री गोपाल राय, स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन, परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत, खाद्य व आपूर्ति मंत्री इमरान हुसैन, समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम, विधानसभा के स्पीकर रामनिवास गोयल और डिप्टी स्पीकर राखी बिडलान मौजूद रहे।
प्रसिद्ध गायकों ने गाया गणेश वंदन
कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन मुंबई से जुड़े हुए थे। उन्होंने अपनी सुमधुर आवाज में गणेश वंदना की। सबसे पहले ‘वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ:’ इसके बाद ‘गणनायकाय, गननायकाय धीमहीं’ गाकर समां बांधा। उनके बाद राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त गायक सुरेश वाडेकर और पद्मा वाडेकर ने ‘ओम गं गणपतये नमों नम:’ गाकर श्रीगणेश जी की आरती की। उन्होंने जय गणेश-जय गणेश जय गणेश देवा व कई और भजन भी गाए। इस दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पत्नी सुनीता हाथ जोड़कर मंत्रमुग्ध अवस्था में पूजा करते नजर आए।
‘स्वतंत्रता आंदोलन में रही गणेशोत्सव की अहम भूमिका’
इस मौके पर केजरीवाल ने दिल्लीवासियों से कहा कि ब्रिटिश काल में लोग सांस्कृतिक कार्यक्रम या उत्सव एक साथ मिलकर नहीं मना सकते थे। इसलिए लोग घरों में पूजा करते थे। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने पुणे में पहली बार सार्वजनिक रूप से गणेश उत्सव मनाया। आगे चलकर उनकी यह कोशिश एक आंदोलन बनी और स्वतंत्रता आंदोलन में इस गणेशोत्सव ने लोगों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई। एक तरफ से गणेश चतुर्थी के लोगों को इकट्ठा करने का काम किया। लोगों में देशभक्ति जगाने का काम किया, ताकि वे एक साथ आकर भगवान की पूजा करें और देश के लिए मिलकर लड़ें।
सीएम ने कहा कि हम सभी को अपने बच्चों में आध्यात्मिकता और देशभक्ति के इस मिश्रण को विकसित करना चाहिए। यह त्यौहार हम सब भारतवासियों को एकजुट होकर तमाम परेशानियों और परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति देता है। कोरोना के खिलाफ देश इस वक्त सदी की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रहा है। हमें एकजुट होकर इसे हराना है। कोरोना के चलते इस बार पंडालों के सार्वजनिक कार्यक्रमों की इजाजत नहीं है। इसलिए सभी के लिए यह शानदार गणेश पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया।