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सिरसा का गुरुद्वारा कमेटी का अध्यक्ष बनना मुश्किल

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नई दिल्ली। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा का दोबारा अध्यक्ष बनना मुश्किल दिखाई पड़ रहा है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा निदेशालय ने सिरसा की नामजदगी को खारिज कर दिया है। निदेशालय ने कहा कि सिरसा गुरबानी और गुरुमुखी की परीक्षा में फेल हो गए हैं। निदेशालय इस निर्देश को अदालत में पेश करेगा। मामला अदालत में भी लंबित है।
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जागो पार्टी के परमिंदर सिंह ने बताया कि गुरुमुखी परीक्षा में सिरसा फेल हो गए हैं। गुरु ग्रंथ साहिब के अंग 1358 पर लिखित गुरुबाणी नहीं पढ़ पाए थे। अपनी मर्जी के कुल 46 शब्द सिरसा ने गुरुमुखी में लिखे थे। उसमें भी 27 अशुद्ध निकले। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एक्ट की धारा 10 में कमेटी सदस्य बनने की पात्रता पूरी नहीं करने के कारण सिरसा अयोग्य घोषित हो गए हैं।
अदालत के आदेश के बाद आधारभूत धार्मिक परीक्षा पिछले सप्ताह शुक्रवार को चुनाव निदेशालय में ली गई। जिसमें सिखों से जुड़े मूल प्रश्नों का जवाब देना था। चुनाव निदेशालय ने गुरुबानी का पाठ और गुरुमुखी में लिखे लेख को पढ़ने को कहा था। पूरे प्रक्रिया की लाइव-वीडियो रिकार्डिंग भी की गई।
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कमेटी के सदस्य हरविंदर सिंह सरना ने सिरसा के खिलाफ अदालत में धार्मिक परीक्षा के लिए अर्जी लगाई थी। इसके बाद चुनाव निदेशालय ने परीक्षा ली थी। अब मामला फिर अदालत में पहुंचेगा।
सिख राजनीति के जानकारों का कहना है कि धार्मिक आधार पर सिरसा की नामजदगी खत्म हो जाएगी। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति को अपने प्रतिनिधि के तौर पर किसी और को नामजद करना होगा। 24 सितंबर को नए नाम की घोषणा होने के साथ दो सदस्य लाटरी से भी चुने जाएंगे।
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