मुर्गी व अंडे ही नहीं शकाहारी भोजन करना भी महंगा साबित हो रहा है। गरीबों की थाली से दाल गायब है, सब्जियों के दाम भी अधिक हैं। ऐसे में आम लोग का जिंदगी गुजर बसर करना भारी पड़ रहा है। दाल के भाव सब्जियों के भाव ने गृहिणियों की रसोई का बजट बिगाड़ कर रखा दिया है। भावों में एकदम से इतना उछाल आया है कि कम आय वाले परिवारों के लिए हरी सब्जी खरीदकर खाना मुश्किल हो रहा है। टमाटर के साथ भिंडी, तोरई, घीया, फूल गोभी, पत्तागोभी, खीरा के भावों में जोरदार उछाल आया है। 40-80 रुपये प्रतिकिलो बिक रही है।
क्या कहती है गृहणी
हर दिन सुबह उठने पर पता चलता है कि कभी रसोई गैस के दाम बढ़ गए तो कभी पेट्रोल का। सब्जी की दुकान पर पहुंचने पर सब्जियां भी महंगी हैं। कोविड की वजह से वैसे ही व्यापार का बुरा हाल है ऐसे में महंगाई बढ़ने से स्थिति बिगड़ रही है। बच्चों की स्कूल फीस ही नहीं पिछले साल का एरियर भी जोड़कर लिया जा रहा है। नवरात्र में फलहार की थाली भी इन दिनों महंगी हो गई है। यहां तक की सेंधा नमक के भाव भी बढ़ गए हैं। -गृहणी विनीता शर्मा
प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ खाना इस मौसम में बेहद आवश्क है। लेकिन दूध, दही, अंडा, पनीर समेत सभी चीजें महंगी हो गई हैं। हर दिन भाव बढ़ता है जैसे महंगाई की तरफ किसी सरकार का ध्यान ही नहीं है। हर महीने रसोई गैस के भाव बढ़ जाते हैं तो प्रतिदिन पेट्रोल, डीजल के। ऐसे में खर्च चलाना बेहद मुश्किल होता है। -छात्र, डॉ. अनामिका
महंगाई की वजह से खरीदारी पर भी असर दिख रहा है। ग्राहक जब बाजार पहुंकर भाव पूछते हैं और उन्हें हर महीने भाव में अंतर मालूम होता है तो वह खरीदारी कम करते हैं। इनदिनों मोल-भाव करने पर भी ग्राहकों को ज्यादा छूट नहीं मिलती। पेट्रोल के भाव बढ़ने से ट्रांस्पोर्टेशन खर्च बढ़ गया है। इस वजह से महंगा सामान बेचना व्यापारियों की मजबूरी है। -विनोद शर्मा, व्यापारी जनपथ