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नवरात्रि में महंगाई: 300 रुपये किलो हुआ सेंधा नमक, टमाटर दिखा रहा 'लाल रंग'

Tue, 12 Oct 2021 01:32 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महंगाई इन दिनों सड़क से रसोई तक पहुंच गई है। पेट्रोल की कीमत बढ़ने से जहां सड़क पर वाहन चलाना भारी पड़ रहा है तो वहीं रसोई चलाने के लिए संसाधन जुटाना भारी पड़ रहा है। पेट्रोल 100 रुपये प्रतिलीटर के पार है तो खाना पकाने के लिए इस्तेमाल में आने वाला सरसो तेल 175 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा पहुंच गया है।
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महंगाई की मार से लोग परेशान। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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नवरात्रों पर टमाटर एक बार लाल रंग दिखा रहा है। नवरात्र के महीने में इसकी कीमत 70 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंच गया है। इससे एक टमाटर करीब 5 रुपये में पड़ रहा है। वहीं, 200 रुपये प्रतिकिलो बिकने वाला सेंधा नमक इस साल पंसारी की दुकान पर एक किग्रा 300 रुपये में बिक रहा है। इतना ही नहीं, पेट्रोल की कीमत 100 रुपये से ऊपर जाने पर अपनी कार से बाजार जाना भी आसान नहीं है।

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शतक पार किया पेट्रोल का भाव
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग से आम आदमी को छुटकारा मिलता नहीं दिख रहा। तकरीबन रोज पेट्रोल और डीजल के दामों का नया रिकॉर्ड बन रहा है। दिल्ली में सोमवार को पेट्रोल 30 पैसे जबकि डीजल 35 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया। इससे पेट्रोल की कीमत 104 रुपये व डीजल की 92.82 रुपये लीटर पहुंच गई। घरेलू बाजार में वाहन ईंधन अभी तक के उच्च स्तर पर हैं। छोटे निजी वाहन की बात करें तो 104 रुपये में महज 20-22 किलोमीटर ही चल पाते है। वहीं, दूसरी तरफ ट्रेन से 25 किलोमीटर सफर करने के लिए जहां 10 रुपये का टिकट था वह बढ़कर अब 30 रुपये हो गया है।

सड़क से रसोई तक महंगाई में लगी आग
महंगाई इन दिनों सड़क से रसोई तक पहुंच गई है। पेट्रोल की कीमत बढ़ने से जहां सड़क पर वाहन चलाना भारी पड़ रहा है तो वहीं रसोई चलाने के लिए संसाधन जुटाना भारी पड़ रहा है। पेट्रोल 100 रुपये प्रतिलीटर के पार है तो खाना पकाने के लिए इस्तेमाल में आने वाला सरसो तेल 175 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा पहुंच गया है। यही हाल रसोई गैस का है। प्रति सिलिंडर रसोई गैस 884 रुपये मिल रहा है। जबकि अगस्त महीने में इसकी कीमत 834 रुपये थी। कुल मिलाकर सड़क से रसोई तक महंगाई में आग लगी हुई है।
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प्रोटीन युक्त मुर्गा ही नहीं अंडे भी हुए महंगे
कोविड काल में डॉक्टरों ने नसीहत दी कि प्रोटीन युक्त भोजन करें। इस नसीहत के बाद मुर्गा मंडी में मुर्गी महंगी हुई तो इसके अंडे भी सातवें आसमान पर पहुंच गया। प्रति अंडा इन दिनों 7 रुपये में मिल रहा है। जबकि ये अंडे छह महीने पहले तक 5 रुपये बिक रहे थे। इसी तरह ब्रेड की बात करें तो प्रति ब्रेड 5 रुपये में मिल रहा है। इसी तरह दुग्ध प्रोडक्ट भी दुध की कीमत में वृद्धि की वजह से बढ़ गया है। 270 रुपये प्रतिकिलो बिकने वाला पनीर 300 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंच गया है। अंडा, ब्रेड, दूध व बटर की कीमत बढ़ने से सुबह का नाश्ता भी महंगा हो गया है। मुर्गे की बात करें तो पिछले साल जहां 180 रुपये किलो बिक रहा था वहीं इन दिनों 220 रुपये।

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गरीबों की थाली से दाल व हरी सब्जियां भी गायब

मुर्गी व अंडे ही नहीं शकाहारी भोजन करना भी महंगा साबित हो रहा है। गरीबों की थाली से दाल गायब है, सब्जियों के दाम भी अधिक हैं। ऐसे में आम लोग का जिंदगी गुजर बसर करना भारी पड़ रहा है। दाल के भाव सब्जियों के भाव ने गृहिणियों की रसोई का बजट बिगाड़ कर रखा दिया है। भावों में एकदम से इतना उछाल आया है कि कम आय वाले परिवारों के लिए हरी सब्जी खरीदकर खाना मुश्किल हो रहा है। टमाटर के साथ भिंडी, तोरई, घीया, फूल गोभी, पत्तागोभी, खीरा के भावों में जोरदार उछाल आया है। 40-80 रुपये प्रतिकिलो बिक रही है। 

क्या कहती है गृहणी
हर दिन सुबह उठने पर पता चलता है कि कभी रसोई गैस के दाम बढ़ गए तो कभी पेट्रोल का। सब्जी की दुकान पर पहुंचने पर सब्जियां भी महंगी हैं। कोविड की वजह से वैसे ही व्यापार का बुरा हाल है ऐसे में महंगाई बढ़ने से स्थिति बिगड़ रही है। बच्चों की स्कूल फीस ही नहीं पिछले साल का एरियर भी जोड़कर लिया जा रहा है। नवरात्र में फलहार की थाली भी इन दिनों महंगी हो गई है। यहां तक की सेंधा नमक के भाव भी बढ़ गए हैं। -गृहणी विनीता शर्मा

प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ खाना इस मौसम में बेहद आवश्क है। लेकिन दूध, दही, अंडा, पनीर समेत सभी चीजें महंगी हो गई हैं। हर दिन भाव बढ़ता है जैसे महंगाई की तरफ किसी सरकार का ध्यान ही नहीं है। हर महीने रसोई गैस के भाव बढ़ जाते हैं तो प्रतिदिन पेट्रोल, डीजल के। ऐसे में खर्च चलाना बेहद मुश्किल होता है। -छात्र, डॉ. अनामिका

महंगाई की वजह से खरीदारी पर भी असर दिख रहा है। ग्राहक जब बाजार पहुंकर भाव पूछते हैं और उन्हें हर महीने भाव में अंतर मालूम होता है तो वह खरीदारी कम करते हैं। इनदिनों मोल-भाव करने पर भी ग्राहकों को ज्यादा छूट नहीं मिलती। पेट्रोल के भाव बढ़ने से ट्रांस्पोर्टेशन खर्च बढ़ गया है। इस वजह से महंगा सामान बेचना व्यापारियों की मजबूरी है। -विनोद शर्मा, व्यापारी जनपथ
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