नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने दो महिलाओं द्वारा विशेष अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली दायर याचिका पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को नोटिस जारी किया है। याचिका में ट्रायल कोर्ट द्वारा उनकी हिरासत और जांच की अवधि 90 से 180 दिन तक बढ़ाने को चुनौती दी गई है।
मिजा सिद्दीकी (23) और शिफा हारिस (27) को एनआईए ने पिछले साल अगस्त में केरल के कन्नूर से गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने उन पर आतंकी संगठन के लिए धन जुटाने और युवाओं को आईएसआईएस में शामिल होने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी विचारधारा फैलाने का आरोप लगाया है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की खंडपीठ ने एनआईए को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई के लिए आठ फरवरी तय की है।
अधिवक्ता अशोक अग्रवाल और अदिति सारस्वत के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि उनकी न्यायिक हिरासत की 90 दिनों की वैधानिक अवधि 14 नवंबर को समाप्त होने वाली थी, लेकिन 11 नवंबर को एनआईए ने विशेष अदालत के समक्ष एक आवेदन दायर कर अवधि बढ़ने की मांग की। कोर्ट ने अर्जी मंजूर करते हुए नजरबंदी की अवधि बढ़ाकर 180 दिन कर दी। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों ने जमानत याचिका दायर की, लेकिन निचली अदालत ने इसे इस आधार पर खारिज कर दिया कि नजरबंदी की अवधि बढ़ाने वाला आदेश अभी भी कायम है।
उन्होंने कहा कि विशेष अदालत का आदेश एनआईए अधिनियम के तहत आवश्यकता को पूरा करने में विफल रहा है, जिसमें कहा गया है कि हिरासत अवधि बढ़ाने की मांग करने की रिपोर्ट में आधार साफ होना चाहिए। याची ने हाईकोर्ट से निचली अदालत का आदेश रद्द करने और उन्हें डिफ़ॉल्ट जमानत पर रिहा करने का निर्देश देने का आग्रह किया है।