फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने कहा- कॉल विवरण उपलब्ध कराने से अधिकारियों की सुरक्षा को खतरा

Wed, 08 Jun 2022 05:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अदालत ने कहा कि छापा मारने वाले वाले दल के सदस्य एक विशेष जांच एजेंसी से संबंधित होते हैं, जो राष्ट्रीय हित, आतंकवाद व मादक पदार्थ तस्करी के मामलों में जांच करती है। उनके कॉल डिटेल उपलब्ध कराने से उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
 
विज्ञापन
delhi high court - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हाईकोर्ट ने छापा मारने वाले पुलिस अधिकारियों का नंबर उपलब्ध कराने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि छापा मारने वाले वाले दल के सदस्य एक विशेष जांच एजेंसी से संबंधित होते हैं, जो राष्ट्रीय हित, आतंकवाद व मादक पदार्थ तस्करी के मामलों में जांच करती है। उनके कॉल डिटेल उपलब्ध कराने से उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

विज्ञापन


अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए छापा मारने वालेअधिकारिायों का नंबर उपलब्ध कराने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) उपलब्ध कराने से उनके गुप्त मुखबिरों की पहचान भी उजागर हो सकती है। उनकी सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। 

साथ ही उनके मुखबिरों की पहचान भी उजागर हो सकती है।अदालत ने यह टिप्पणी मादक पदार्थ मामले में छापामारने वाली टीम का नंबर उपलब्ध कराने की मांग वाली याचिका में की है। छापा मारने वाले दल ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार  किया था।
विज्ञापन


याचिका में बाबा हरिदास नगर पुलिस थाने में दर्ज मादक पदार्थ मामले में छापा मारने गए दल के सदस्यों के नंबर व उनके मोबाइल की लोकेशन बताने की मांग की गई थी।अभियोजन पक्ष के अनुसार 8 अक्टूबर, 2021 को एक पुलिस अधिकारी को गोपनीय सूचना मिली थी कि तीन व्यक्ति एक ट्रक में ओडिशा से प्रतिबंधित गांजा लेकर  नजफगढ के पास एक व्यक्ति तक पहुंचाने आ रहे हैं। इसके बाद कई पुलिस अधिकारियों एक दल ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था।
रात तीन बजे तक शराब परोसने की व्यवस्था पर अदालत ने जताई चिंता 

नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने बार में सुबह तीन बजे तक शराब परोसने के मुद्दे पर कहा कि उस समय लोगों की सुरक्षा व कानूनी व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत होती है। इस दशा में आबकारी विभाग व पुलिस एक सलाहकार समूह गठित करे और सभी पहलुओं पर विचार करे। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने कहा कि अदालत का इरादा आबकारी विभाग की नीति बनाने में व्यवधान डालने का नहीं है, लेकिन सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों के संचालन के समय को विनियमित करने में पुलिस के साथ पूर्ण सामंजस्य होना चाहिए।

पुलिस व आबकारी विभाग इसको लेकर सलाहकार समिति गठित करे। पीठ ने नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन आफ इंडिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि बार या ऐसे प्रतिष्ठान जहां शराब परोसी जाती है, वहां निस्संदेह जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ता है।  

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें