नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें केन्द्र को गृह मंत्रालय के अधीन बलों के लिए भी रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले सशस्त्र बलों की तरह पेंशन योजना लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ की पीठ ने ‘हमारा देश हमारे जवान’ ट्रस्ट की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पीड़ित कर्मियों द्वारा कई याचिकाएं पहले से ही लंबित हैं।
न्यायमूर्ति एंडलॉ ने कहा इस मुद्दे को लेकर प्रभावित लोग पहले ही अदालत में याचिका दायर कर चुके हैं और उन पर सुनवाई पहले ही जारी है। इस संबंध में कई याचिकाएं हैं। उन्होंने कहा कि लंबित याचिकाओं पर जो फैसला आएगा, वे इस तरह की सभी संबंधित याचिकाओं पर लागू होगा।
अदालत ने ट्रस्ट के वकील अजय के. अग्रवाल से कहा हर व्यक्ति को याचिका दायर करने की जरूरत नहीं है। जो मुद्दा आप उठा रहे हैं वह इससे प्रभावित लोग पहले ही उठा चुके हैं।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल ने कहा कि एक ही मामले पर कई याचिकाएं दायर करने की जरूरत नहीं है। साथ ही उन्होंने याचिकाकर्ता से लंबित कार्यवाही में शामिल होने को कहते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
अदालत ने ट्रस्ट को अन्य कानूनी उपायों का इस्तेमाल करने या लंबित कार्यवाही में शामिल होने की स्वतंत्रता देने के साथ अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
केन्द्र सरकार द्वारा 2003 में एक नई पेंशन योजना की घोषणा की गई थी और इसे सशस्त्र बलों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया था। पुरानी पेंशन योजना को गृह मंत्रालय के अधीन सशस्त्र बलों को देने से मना कर दिया गया था, जबकि इसे रक्षा मंत्रालय के अधीन सशस्त्र बलों पर लागू करने की अनुमति दी गई थी। तर्क दिया गया था कि गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण वाले बल भारतीय संघ के सशस्त्र बल नहीं हैं।