फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट का आदेश- स्कूल का नाम व विल्डिंग की फोटो हटाकर किया जा सकता है प्रसारण

Sat, 14 Aug 2021 05:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • 7 वर्षीय छात्र की हत्या पर आधारित ए बिग लिटिल मर्डर डायक्युमेंटरी के प्रसारण पर रोक
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उच्च न्यायालय ने गुरुग्राम स्थित एक स्कूल को राहत प्रदान करते हुए स्कूल में 7 वर्षीय छात्र की हत्या पर आधारित ए बिग लिटिल मर्डर वूत्तचित्र के प्रसारण या स्ट्रीमिंग करने पर रोक लगा दी है। अदालत ने नेटफ्लिक्स, चैनल न्यूज एशिया और अन्य को  निर्देश दिया कि वे स्कूल से संबंधित फोटो हटाने के बाद वृत्तचित्र को स्ट्रीम कर सकते हैं। उन भागों को भी हटाना होगा जहां स्कूल की इमारत को चित्रित किया गया है। 

विज्ञापन


न्यायमूर्ति जयंत नाथ ने यह आदेश स्कूल के ट्रस्ट जेवियर्स एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा दायर याचिका पर दिया है। साथ ही अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर मामले की सुनवाई 21 अक्तूबर तय की है।

अदालत ने कहा कि गुरुग्राम के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा 8 जनवरी 18 को दिए उस आदेश का उल्लंघन है जिसमें स्कूल का नाम, बिल्डिंग इत्यादि को दिखाने पर रोक लगाई थी। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला याची के हक में बनता है।
विज्ञापन


याची ट्रस्ट ने दायर याचिका में वृत्तचित्र के प्रसारण, स्ट्रीमिंग और किसी भी रूप में या किसी भी माध्यम में वृत्तचित्र या उसके ट्रेलरों या संक्षिप्त संस्करणों पर भी रोक लगाने की मांग की। इसके अलावा वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर दिखाने पर रोक लगाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा यह मामला अभी गुरुग्राम कोर्ट में विचाराधीन है।

याची की और से पेश अधिवक्ता राजीव विरमानी व संदीप कपूर ने अदालत को बताया कि वृत्तचित्र में स्कूल के नाम के साथ ही बिल्डिंग को भी दिखाया गया है जो सत्र अदालत द्वारा दिनांक 8 जनवरी 18 के आदेश का उल्लंघन है। इतना ही नहीं इस मामले में किसी भी प्रकार से ट्रस्ट व स्कूल का नाम प्रयोग करने के लिए अनुमति नहीं ली गई।

उन्होंने कहा कि इसी मामले में लिखित पुस्तक पर भी हाईकोर्ट ने पहले ही रोक लगा दी थी क्योंकि उसमें भी स्कूल के नाम का प्रयोग किया गया था। अदालत ने सभी तथ्यों को देखने के बाद वृत्तचित्र की स्ट्रीमिंग, प्रसारण व टाईटिल पर रोक लगा दी।

 

विज्ञापन

महिला के खिलाफ कार्रवाई पर रोक

उच्च न्यायालय ने अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म अपनाने वाली 28 वर्षीय महिला के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह जामिया नगर और शाहीन बाग पुलिस स्टेशनों के बीट स्टाफ और एसएचओ के फोन नंबर महिला को उपलब्ध करवाए ताकि वह जरूरत पड़ने पर सुरक्षा के लिए उनसे संपर्क कर सके।

याची ने तर्क रखा है कि उसने 2018 में इस्लाम धर्म अपनाया था उसे उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते से गिरफ्तारी की आशंका है। उस पर अवैध धर्मांतरण का आरोप लगाया गया है।

बायोफिजिक्स में अपना मास्टर्स कर चुकी महिला ने आरोप लगाया कि उसे जामिया नागर थाने में आने के लिए मजबूर किया जा रहा है ऐसे में थानाध्यक्ष को निर्देश दिया जाए कि उसे परेशान करना बंद किया जाए। वहीं दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि उसके खिलाफ थाने द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। 

उसे यूपी एटीएस से जांच के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करने का अनुरोध प्राप्त हुआ है। इसके आवा अदालत के आदेश पर महिला को सुरक्षा प्रदान नहीं की जा रही क्योंकि वह अपना पता नहीं बता रही। महिला ने कहा कि गिरफ्तारी की आशंका के वे पुलिस को अपने रहने का पता नहीं बताया चाहती।

न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने पुलिस की रिपोर्ट व महिला का तर्क सुनने के बाद मामले की सुनवाई 26 अगस्त तय कर दी। अदालत ने कहा कि महिला का पता पूछने की अपेक्षा पुलिस संबंधित थानाध्यक्ष व बीट स्टाफ का फोन नंबर उसे प्रदान करे ताकि जरूरत पड़ने पर वह अपने वकील के जरिए उनसे संपर्क कर सके।

याची महिला ने अधिवक्ता वजीह शफीक के माध्यम से दायर याचिका में अदालत को बताया कि उसने मुफ्ती काजी जहांगीर आलम और मौलाना उमर गौतम की मदद और मार्गदर्शन से बिना किसी दबाव, धमकी, प्रलोभन के दिल्ली में धर्मांतरण किया। आलम और गौतम दोनों को यूपी एटीएस ने जून में दिल्ली से गिरफ्तार किया था।

19 जून को महिला ने दायर याचिका में कहा, उसे अपने पिता का फोन आया जिसने उसे यूपी एटीएस को बताया और कुछ स्वयंभू सजग समूह उसे दिल्ली से फोन करने और उसे वापस हिंदू धर्म में बदलने के लिए दबाव बना रहे है। याचिका में कहा गया है कि 27 जून को फोन पर यूपी एटीएस ने भी बड़े पैमाने पर पूछताछ की थी।

दिल्ली पुलिस की कथित कार्रवाइयों के बारे में महिला ने कहा कि उसके पड़ोसी को 7 जुलाई को जामिया नगर पुलिस ने कथित तौर पर उठाया था और उसे खुद को पुलिस स्टेशन में पेश करने के लिए बताने के लिए कहा गया था। जामिया मिलिया इस्लामिया के बायोफिजिक्स विभाग के कर्मचारियों से भी उनके बारे में पूछताछ की गई थी।
याची ने कहा उसे जान का खतरा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें