नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने सब डिवीजन मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को अदालत की अवमानना नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा एसडीएम ने प्रथम दृष्टया विशेष विवाह अधिनियम (एसएमए) के तहत अपने साथी से शादी करने के इच्छुक व्यक्ति के निवास पर नोटिस भेजकर अदालत की अवमानना की है। एसएमए के तहत ऐसे किसी नोटिस को भेजने पर रोक लगाने के आदेश का उल्लंघन किया गया है।
न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने एक दंपती की याचिका पर सुनवाई करते हुए मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किया। उन्होंने एसडीएम को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न उनके खिलाफ अदालती अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर तय की है।
अदालत ने कहा कि जब भी कोई जोड़ा शादी को एसएमए के तहत पंजीकृत कराने आता है तो उन्हें उनके आवासों पर नोटिस नहीं भेजा जाना है। इस तरह के नोटिस भेजने पर प्रतिबंध है जो आवेदकों की योजना को खतरे में डालने या उनके जीवन के लिए एक खतरा बन सकता है।
अदालत ने कहा कि अप्रैल 2009 में उच्च न्यायालय ने एक आदेश पारित किया था। इसमें निर्देश दिया गया था कि एसएमए के तहत नोटिस को दंपती के घरों में भेजे जाने के बजाय कार्यालय नोटिस बोर्ड पर लगाया जाए। इस आशय के निर्देश भी दिल्ली सरकार द्वारा सभी उपायुक्तों को जारी किए गए थे।
पेश मामले में एसडीएम द्वारा एक आवेदक के आवास पर नोटिस भेजा गया था, जिसमें उसके और उसके साथी द्वारा एसएमए के तहत शादी का पंजीकरण कराया गया था।
अदालत ने कहा नोटिस जारी करने का उपरोक्त रवैया 9 अप्रैल 2009 के इस न्यायालय के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। प्रथम दृष्टया, अदालत का मानना है कि मजिस्ट्रेट ने अदालत की अवमानना की है।