अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि दयाल पुर क्षेत्र में 24 फरवरी को हुए दंगों में दंगाइयों की भीड़ ने हमलाकर लूटपाट व आगजनी की। इतना ही नहीं उन्होंने पुलिस से आंसू गैस के गोले व उनकी लाठियां छीन कर हमला कर दिया था। इस हमले में डीसीपी, एसीपी सहित कई अधिकारियों को गंभीर चोटें आईं और करीब 50 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
सरकारी वकील ने कहा कि दंगे पूर्व नियोजित थे और घटना से पहले ही इसकी तैयारी कर ली गई थी। इन दंगों में हेड कांस्टेबल रतन लाल की मौत हो गई। आरोपियों पर गंभीर आरोप है। वहीं बचाव पक्ष ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किलों को फर्जी मामले में फंसाया गया है और ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि उनके मुवक्किलों का अपराध साबित हो।
इसके अलावा मामले में आरोपपत्र दायर है और ट्रायल ने देरी होगी। आरिफ के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल उसी इलाके में रहता है और पुलिस ने उसे मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी बनाया है। वहीं उसे एक अन्य मामले में ट्रायल कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद ने कहा कि उनके खिलाफ मामला द्वेष के चलते दर्ज किया गया है और उनके खिलाफ पेश आरोप पत्र पुलिस अधिकारी की कल्पना का नतीजा है जिसने इसका ड्राफट तैयार किया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष खालिद की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पाइस ने जमानत पर जिरह करते हुए तर्क रखा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ गवाहों के बयान असंगत हैं और आरोप पत्र टेलीविजन सीरियल की पटकथा जैसा दिखता है। उन्होंने कहा कि आरोप पत्र पुलिस अधिकारी की उपजाऊ कल्पना का परिणाम है जिसने इसका ड्राफट तैयार किया और गवाहों को पेश किया है। उन्होंने कहा अधिकारी फैमिली मैन की स्क्रिप्ट नहीं लिख रहे, यह एक आरोप पत्र है। उन्होंने कहा कि गवाहों के बयान एक दूसरे के अनुरूप हैं और यूएपीए के तहत परीक्षण को पूरा करते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपपत्र मात्र पुलिस अधिकारी की कल्पना के बजाय किसी भी सबूत पर आधारित नहीं है। उन्होंने कहा अधिकारी को पता है कि उनके मुवक्किल के दिमाग में क्या षडयंत्र चल रहा है। वह स्वयं को सुरक्षित रख कर दिल्ली को आग में फेंक देगा।उन्होंने कहा पहले खालिद पर अमरावती में उत्तेजक भाषण देने का आरोप लगाया गया था जो वीडियो देखने पर एक शांतिपूर्ण घटना बन गई।
उन्होंने कहा उनके मुवक्किल वहां सीएए के बारे में बात रहे है। अभियोजन पक्ष इसे आतंक के रूप में चित्रित करने की कोशिश कर रहे है। उन्होंने जी टीवी के साथ खालिद के साक्षात्कार सहित विभिन्न दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि उनके मुवक्किल ने कभी नहीं कहा कि भारत तेरे टुकडे होंगे, जैसा कि आरोप पत्र में दर्शाया गया है।
उन्होने इस आरोप पत्र में भारत तेरे टुकड़े होंगे कहां से आ गया जबकि पहले आरोपपत्र में यह नहीं था। उन्होंने कहा खालिद के खिलाफ जनमत बनाने के लिए आरोप पत्र में भाषा और आरोपों की प्रकृति को गलत तरीके से दर्शाया गया है। उसे अपराधी के रूप में दिखाया जा रहा है।
आरोप पत्र में पेश कई बयानों ने अन्यथा धर्मनिरपेक्ष विरोध को सांप्रदायिक रंग दे दिया। आरोपपत्र में कहा गया है कि यह भी तय किया गया था कि मस्जिदों को केंद्र बिंदु होना चाहिए। उन्होंने कहा यदि इस बयान का कोई आधार नहीं है तो सांप्रदायिक रंग किसने दिया है।
अदालत ने मामले की सुनवाई 6 सितंबर तय की है।