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दिल्ली दंगा: उच्च न्यायालय ने हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या के मामले में पांच आरोपियों को दी जमानत

Fri, 03 Sep 2021 03:50 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

अदालत ने दिल्ली पुलिस के आरोपियों को जमानत न देने के तर्क पर असमति जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता आरिफ को 11 मार्च 20 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में है। उसकी गिरफ्तारी को 17 महीने हो गए हैं।
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में आरोपी मोहम्मद आरिफ सहित पांच को जमानत प्रदान कर दी। इस मामले में एक हेड कांस्टेबल की गोली लगने से मौत हो गई थी, जबकि पुलिस उपायुक्त, सहायक पुलिस आयुक्त सहित 50 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। 

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अदालत ने कहा कि अस्पष्ट साक्ष्य और सामान्य आरोप गैरकानूनी रूप से एकत्रित होने व हत्या पर लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं है। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने अपने फैसले में आरिफ के अलावा शाहबाद अहमद, फुरकान, सुवलीन और तबस्सुम को जमानत प्रदान की है।

अदालत ने दिल्ली पुलिस के आरोपियों को जमानत न देने के तर्क पर असमति जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता आरिफ को 11 मार्च 20 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में है। उसकी गिरफ्तारी को 17 महीने हो गए हैं।
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अदालत ने कहा जमानत न्यायशास्त्र एक आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के बीच की खाई को पाटने का प्रयास बरकरार है। यह किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सुरक्षित करने और यह सुनिश्चित करने के बीच जटिल संतुलन है कि इस स्वतंत्रता से सार्वजनिक व्यवस्था में अंतिम अशांति न हो। यह प्रबल है और हमारे संविधान में निहित सिद्धांतों के खिलाफ है कि किसी अभियुक्त को मुकदमे के लंबित होने के दौरान सलाखों के पीछे रहने की अनुमति दी जाए।

उन्होंने कहा यह न्यायालय का संवैधानिक कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करें कि राज्य की सत्ता की अधिकता के चलते व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मनमाना अभाव न हो। जमानत नियम है और जेल अपवाद है, अदालतों को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करना चाहिए।

अदालत ने सभी आरोपियों की जमानत 35-35 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके व एक-एक अन्य जमानत राशि पर स्वीकार की है। अदालत ने उन्हें बिना इजाजत दिल्ली से बाहर न जाने, सप्ताह में एक दिन थाने में हाजिरी लगाने, अपना मोबाइल नंबर जांच अधिकारी को देने का भी निर्देश दिया है।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि दयाल पुर क्षेत्र में 24 फरवरी को हुए दंगों में दंगाइयों की भीड़ ने हमलाकर लूटपाट व आगजनी की। इतना ही नहीं उन्होंने पुलिस से आंसू गैस के गोले व उनकी लाठियां छीन कर हमला कर दिया था। इस हमले में डीसीपी, एसीपी सहित कई अधिकारियों को गंभीर चोटें आईं और करीब 50 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

सरकारी वकील ने कहा कि दंगे पूर्व नियोजित थे और घटना से पहले ही इसकी तैयारी कर ली गई थी। इन दंगों में हेड कांस्टेबल रतन लाल की मौत हो गई। आरोपियों पर गंभीर आरोप है। वहीं बचाव पक्ष ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किलों को फर्जी मामले में फंसाया गया है और ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि उनके मुवक्किलों का अपराध साबित हो। 

इसके अलावा मामले में आरोपपत्र दायर है और ट्रायल ने देरी होगी। आरिफ के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल उसी इलाके में रहता है और पुलिस ने उसे मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी बनाया है। वहीं उसे एक अन्य मामले में ट्रायल कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
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आरोप पत्र पुलिस अधिकारी की कल्पना का नतीजा- खालिद

दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद ने कहा कि उनके खिलाफ मामला द्वेष के चलते दर्ज किया गया है और उनके खिलाफ पेश आरोप पत्र पुलिस अधिकारी की कल्पना का नतीजा है जिसने इसका ड्राफट तैयार किया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष खालिद की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पाइस ने जमानत पर जिरह करते हुए तर्क रखा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ गवाहों के बयान असंगत हैं और आरोप पत्र टेलीविजन सीरियल की पटकथा जैसा दिखता है। उन्होंने कहा कि आरोप पत्र पुलिस अधिकारी की उपजाऊ कल्पना का परिणाम है जिसने इसका ड्राफट तैयार किया और गवाहों को पेश किया है। उन्होंने कहा अधिकारी फैमिली मैन की स्क्रिप्ट नहीं लिख रहे, यह एक आरोप पत्र है। उन्होंने कहा कि गवाहों के बयान एक दूसरे के अनुरूप हैं और यूएपीए के तहत परीक्षण को पूरा करते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपपत्र मात्र पुलिस अधिकारी की कल्पना के बजाय किसी भी सबूत पर आधारित नहीं है। उन्होंने कहा अधिकारी को पता है कि उनके मुवक्किल के दिमाग में क्या षडयंत्र चल रहा है। वह स्वयं को सुरक्षित रख कर दिल्ली को आग में फेंक देगा।उन्होंने कहा पहले खालिद पर अमरावती में उत्तेजक भाषण देने का आरोप लगाया गया था जो वीडियो देखने पर एक शांतिपूर्ण घटना बन गई।

उन्होंने कहा उनके मुवक्किल वहां सीएए के बारे में बात रहे है। अभियोजन पक्ष इसे आतंक के रूप में चित्रित करने की कोशिश कर रहे है। उन्होंने जी टीवी के साथ खालिद के साक्षात्कार सहित विभिन्न दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि उनके मुवक्किल ने कभी नहीं कहा कि भारत तेरे टुकडे होंगे, जैसा कि आरोप पत्र में दर्शाया गया है।

उन्होने इस आरोप पत्र में भारत तेरे टुकड़े होंगे कहां से आ गया जबकि पहले आरोपपत्र में यह नहीं था। उन्होंने कहा खालिद के खिलाफ जनमत बनाने के लिए आरोप पत्र में भाषा और आरोपों की प्रकृति को गलत तरीके से दर्शाया गया है। उसे अपराधी के रूप में दिखाया जा रहा है।

आरोप पत्र में पेश कई बयानों ने अन्यथा धर्मनिरपेक्ष विरोध को सांप्रदायिक रंग दे दिया। आरोपपत्र में कहा गया है कि यह भी तय किया गया था कि मस्जिदों को केंद्र बिंदु होना चाहिए।  उन्होंने कहा यदि इस बयान का कोई आधार नहीं है तो सांप्रदायिक रंग किसने दिया है।
अदालत ने मामले की सुनवाई 6 सितंबर तय की है।

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