नई दिल्ली। पतंगबाजी के खतरनाक खेल ने एक बार फिर सैकड़ों पक्षियों से उनके उड़ने का हक छीन लिया है। धारदार मांझे ने न सिर्फ बेजुबां परिंदों की परवाज पर डाका डाला, बल्कि कई की जान तक ले ली है। किसी के पंख कट गए हैं, किसी की गर्दन पर गहरा जख्म है। मांझे में उलझकर कोई पैर गंवा बैठा है तो किसी की आंख ही नहीं रही है। 15 दिनों के भीतर सैकड़ों पक्षियों को इंसान के इस खेल में कीमत चुकानी पड़ी है।
चांदनी चौक स्थित जैन मंदिर में चल रहे दुनिया के पहले चैरिटी पक्षी अस्पताल में एक से 15 अगस्त के बीच लगभग 1400 घायल पक्षियों को भर्ती कराया गया। अस्पताल के सचिव सुनील जैन ने बताया कि मांझे से घायल व मरने वाले पक्षियों का आंकड़ा इससे कई गुना अधिक होगा। बहुत से पक्षियों को किसी ने देखा ही नहीं होगा और उनकी मौत हो गई होगी। सिर्फ 15 अगस्त को ही अस्पताल में 150 पक्षियों को भर्ती कराया गया। इनमें अधिकतर कबूतर, चील, कौवे और तोते शामिल हैं। इस माह बकरीद, रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और स्वतंत्रता दिवस के दौरान हुई पतंगबाजी के चलते प्रतिदिन 80 से 90 घायल पक्षी यहां लाए गए।
...और कभी नहीं उड़ पाएंगे
धारदार मांझे से घायल अधिकतर पक्षी जीवन में दोबारा नहीं उड़ पाते हैं। सुनील जैन ने बताया कि पालतू पक्षियों के अलावा जो भी पक्षी यहां लाए जाते हैं, उन्हें यहीं भर्ती कर लिया जाता है, लेकिन ऐसी हालत में वह ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रह पाते हैं। क्योंकि, काफी पक्षियों को गंभीर जख्म होते हैं।
सरकार मांझे पर रोक लगाए
सुनील जैन के मुताबिक, राजधानी में धड़ल्ले से चाइनीज मांझा बिक रहा है। इसके अलावा कांच और केमिकल से बना भारतीय मांझा भी कम खतरनाक नहीं है। सरकार को इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना चाहिए। सबसे अधिक मामले पुरानी दिल्ली, कमला नगर, शक्ति नगर, लक्ष्मी नगर, शास्त्री नगर से आए हैं।
1957 से चल रहा है नि:शुल्क अस्पताल
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि सन 1957 से ही दानदाताओं के सहयोग से पक्षियों का नि:शुल्क अस्पताल चल रहा है। कोरोना महामारी के कारण इस समय न के बराबर सहयोग मिल रहा है। इसके बावजूद प्रतिदिन सुबह 8 से दोपहर 12 बजे तक अस्पताल की ओपीडी में इलाज हो रहा है।