सरकार और किसानों के बीच एक साल से अधिक समय से चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया है। दिल्ली की सीमाओं से किसान अब अपने गांवों का रुख करने लगे हैं। जश्न मनाते हुए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत देश के तमाम राज्यों के किसानों का जत्था शनिवार को लौट जाएगा।
किसान आंदोलन के खत्म होने से सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर के खाली होने से आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। दिल्ली से हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू के लिए जाने वाली बसें, टैक्सी अब लंबे रूट पर नहीं जाएंगी। इससे हर महीने करोड़ों के पेट्रोल की बचत होने के साथ ही वाहनों से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी।
किसान संगठनों ने दावा किया है कि सभी मांगों की 15 जनवरी को दोबारा समीक्षा के बाद आंदोलन खत्म करने पर औपचारिक फैसला लिया जाएगा। फिलहाल इसे स्थगित कर दिया गया है। सरकार की तरफ से संयुक्त किसान मोर्चा को भेजे गए पत्र में किसानों के लंबित मांगों पर सहमति के बाद इसे खत्म करने का संयुक्त किसान मोर्चा ने फैसला लिया है।
शनिवार को जश्न मनाते हुए दिल्ली की सीमाओं से जाएंगे किसान
सीडीएस बिपिन रावत और और उनके साथ हेलीकॉप्टर में मौजूद सहकर्मियों के निधन के शोक में सभी समारोह को स्थगित कर दिया गया। शनिवार को किसानों की तरफ से जश्न की रैलियां निकाली जाएंगी। इस दिन एक साथ किसानों का जत्था दिल्ली की सीमाओं से रवाना होगा। विरोध कर रहे किसानों से की गई अपनी प्रतिबद्धताओं को केंद्र सरकार की ओर से पूरे किए जाएंगे। आगे की रणनीति तय करने के लिए 15 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा की समीक्षा बैठक होगी।
मोर्चा के इर्द गिर्द हुई मुश्किलों पर एसकेएम ने मांगी माफी
लंबे आंदोलन के दौरान धैर्य और समर्थन के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने सभी मोर्चा स्थलों के इर्द गिर्द रहने वालों का धन्यवाद किया है। साथ ही उन्हें इस दौरान हुई परेशानी के लिए माफी मांगी है। इस संघर्ष में किसानों के साथ शामिल हुए श्रमिक संगठन, डॉक्टर, मीडिया कर्मियों, वकीलों सहित सभी वर्गों का धन्यवाद किया है। सभी की एकजुटता को देखते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने आगे भी संघर्ष जारी रखने का निर्णय लिया है।
सफर में कम होगी दूरी, नहीं होगी कोई मजबूरी
किसानों के घर वापसी के फैसले से एक शहर से दूसरे शहरों के लिए आने जाने वालों को काफी राहत मिलेगी। अब तक बस, टैक्सी या निजी वाहनों में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश या जम्मू-कश्मीर के शहरों में आवागमन करने वालों को सीमाओं पर स़ड़कें बंद होने की वजह से लंबी दूरी करने की मजबूरी थी। रास्ते खुलने से उनकी मुश्किलें दूर हो जाएंगी। इससे जहां वाहनों पर खर्च में कमी और वक्त की बचत के साथ साथ वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी कम होगा।