बीते तीन दिसंबर से राजधानी के अस्पतालों में चल रही डॉक्टरों की हड़ताल स्थगित हो चुकी है। पीएमओ से आश्वासन मिलने के बाद डॉक्टरों ने एक सप्ताह तक के लिए हड़ताल को रोक दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर एक सप्ताह तक नीट पीजी काउंसलिंग की तारीख घोषित नहीं की गई तो उसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर फिर से वे हड़ताल पर चले जाएंगे और इस बार ओपीडी, इमरजेंसी के साथ कोविड सेवाओं को भी रोकने की चेतावनी दी है।
जानकारी के अनुसार, नीट पीजी काउंसलिंग में देरी के चलते कई दिनों से देश भर में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल चल रही है। बीते तीन दिसंबर से सफदरजंग, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और आरएमएल अस्पताल में हड़ताल चल रही थी लेकिन छह दिसंबर से रेजिडेंट डॉक्टरों ने आपातकालीन सेवाएं भी बंद कर दीं जिसके बाद मरीजों को रैफर किया जाना शुरू किया गया। इस दौरान अस्पतालों में ऑपरेशन भी रोक दिए गए थे। अब तक करीब साढ़े पांच हजार से अधिक ऑपरेशन टाले जा चुके हैं और सफदरजंग अस्पताल में इलाज न मिलने से एक महिला मरीज की मौत तक दर्ज की गई।
बृहस्पतिवार को फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) के अध्यक्ष डॉ. मनीष ने प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट से काउंसलिंग मामले की सुनवाई जल्दी करने की अपील की ञै। साथ ही स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने पीएमओ की ओर से आश्वासन दिया है कि एक सप्ताह में काउंसलिंग की तारीख घोषित की जाएगी। इसलिए फोर्डा ने हड़ताल पर एक सप्ताह तक की रोक लगाने का फैसला लिया है और सभी डॉक्टरों से तत्काल ओपीडी और अन्य चिकित्सीय सेवाओं के लिए वापस लौटने की अपील की है। फोर्डा की इस अपील के बाद दिल्ली के सभी अस्पतालों में डॉक्टर वापस काम पर लौट आए हैं। सफदरजंग, आरएमएल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, लोकनायक अस्पताल सहित सभी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं पहले की तरह शुरू हो चुकी हैं।
गर्म दूध से जले मासूम को देख भी नहीं आए डॉक्टर
फोर्डा की घोषणा दोपहर को हुई लेकिन इससे पहले मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के लोकनायक अस्पताल में तस्वीरें काफी बैचेन करने वाली मिलीं। यहां गर्म दूध से जले एक मासूम को गोद में लेकर उसका पिता इधर उधर भाग रहा था। बच्चे का एक हाथ करीब कोहनी तक काफी जल भी गया था लेकिन मासूम की हालत देखने के बाद भी डॉक्टर उसकी मदद के लिए आगे नहीं आए। आपातकालीन वार्ड में एक नहीं बल्कि पांच पांच डॉक्टर मौजूद थे लेकिन सुरक्षा गार्डों ने पिता और बच्चे को अंदर प्रवेश ही नहीं करने दिया। पिता मनीष ने बताया कि सुरक्षा गार्डों ने उन्हें हड़ताल के बारे में नहीं बताया बल्कि कहा कि यहां सिर्फ कोरोना मरीजों का इलाज होता है इसे किसी दूसरे अस्पताल ले जाओ। जबकि लोकनायक अस्पताल में सिर्फ कोरोना मरीजों का उपचार होने जैसा कोई नियम लागू नहीं है।
गेट में घुसने तक नहीं दी एंबुलेंस
डॉक्टरों की हड़ताल का असर लोकनायक अस्पताल में इस तरह रहा कि एंबुलेंस को गेट में घुसने तक नहीं दिया जा रहा था। सुरक्षा गार्ड बाहर से ही एंबुलेंस चालक को कहीं और ले जाने का बोल रहे थे। इस बीच दीप चंद बंधु अस्पताल से यहां पहुंचे मरीज जुगल के दोस्त तारु यादव ने बताया कि वे आजादपुर में रहते हैं और बीती रात जुगल पर किसी ने हमला कर दिया था। घायल जुगल को दीप चंद बंधु अस्पताल लेकर गए। यहां एक हाथ में फ्रैक्चर और छाती पर चोटे बताते हुए मरीज को लोकनायक अस्पताल ले जाने के लिए कहा। यह एमएलसी केस होने के बाद भी मरीज को उपचार देने वाला कोई नहीं था। करीब आधा घंटे एंबुलेंस लोकनायक अस्पताल के बाहर खड़ी रही और शाम को चालक सुनील ने बताया कि छह घंटे बाद मरीज को हिंदूराव में भर्ती कराना पड़ा।