कृषि कानूनों को निरस्त करने वाले विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी को औपचारिकता बताते हुए किसान नेताओं ने कहा है कि सरकार उनकी अन्य लंबित मांगों को हल करे। साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी दे। प्रदर्शनकारी किसानों की यह पहली जीत है और हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे। कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा के कुछ दिनों बाद संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में कृषि कानून निरसन विधेयक, 2021 लोकसभा में पेश किया जाएगा।
राष्ट्रीय किसान महासंघ के शिव कुमार शर्मा ने न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि आज की कैबिनेट ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने वाले विधेयक को मंजूरी दी, जिसकी घोषणा पीएम मोदी कर चुके हैं, यह सिर्फ एक औपचारिकता थी। यह सिर्फ एक प्रक्रिया है। उन्हें हमारे साथ एक और दौर की बातचीत करनी चाहिए, जिसमें एमएसपी के मुद्दे पर भी चर्चा की होगी।
वर्तमान विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे किसान संघों के संयुक्त निकाय संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने रविवार को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर किसानों की छह मांगों पर तुरंत बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया। जिसमें एमएसपी पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी भी शामिल है। अन्य मांगों में लखीमपुर खीरी कांड के सिलसिले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र को बर्खास्त करना, गिरफ्तार करना, किसानों के खिलाफ मुकदमे वापस लेना और आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों के लिए स्मारक बनाना शामिल है।
कहा कि भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बुधवार को अपने ट्वीट में स्पष्ट किया कि किसान आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। वह इसे किसानों की जीत तभी कहेंगे जब उन्हें अपनी फसलों का सही दाम मिलना शुरू होगा। यह विरोध अभी खत्म नहीं होगा। हमारी 27 नवंबर को एक बैठक है जिसके बाद हम आगे निर्णय लेंगे।