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लावरिस मवेशियों को काटने वाले गैंग के बादमाशों और पुलिस में मुठभेड़

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नई दिल्ली। लावारिस मवेशी को नशीला इंजेक्शन देकर बेहोश कर उसे काटने वाले गैंग के दो बदमाशों और पुलिस के बीच शुक्रवार रात रोहिणी इलाके में मुठभेड़ हो गई। बदमाशों ने पुलिस टीम पर गोली चला दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में एक बदमाश के पैर में गोली लगी। पुलिस दो बदमाशों को हिरासत में लेने के बाद घायल बदमाश को पास के अस्पताल में ले गई। जहां से प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। पुलिस दोनों बदमाशों को गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ कर आगे की जांच कर रही है।
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जिला पुलिस उपायुक्त बृजेंद्र कुमार यादव ने बताया कि गिरफ्तार बदमाशों की पहचान नरेला निवासी शाहजहां और राजीव नगर बेगमपुर निवासी ललित के रूप में हुई है। इनके कब्जे से पुलिस ने मवेशियों को बेहोश करने वाला इंजेक्शन, मवेशियों को काटने के हथियार, एक पिस्टल, दो कारतूस और दो खोखे बरामद किए हैं। पुलिस ने इनसे छह मवेशी भी बरामद किए हैं।
शुक्रवार रात बाहरी उत्तरी जिला स्पेशल स्टाफ को सूचना मिली कि कुछ लोग रोहिणी सेक्टर 35 इलाके की सुनसान जगह पर अवैध रूप से मवेशी काटने के लिए पहुंचे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। एक बदमाश ने पुलिस टीम को देखते ही उन पर दो गोलियां चला दीं। अपना बचाव करते हुए पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। गोली एक बदमाश के पैर में लगी।
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उसके बाद पुलिस ने घायल शाहजहां और ललित को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने घायल शाहजहां को पास के अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। जांच में पता चला कि शाहजहां को मवेशी काटने के मामले में वर्ष 2015 में अलीपुर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
वर्ष 2016 में कोतवाली थाना पुलिस से उसकी मुठभेड़ हुई थी। फिलहाल पुलिस ने वारदात को अंजाम देने से पहले दोनों को गिरफ्तार कर लिया और मवेशियों को सुरक्षित बचा लिया है।
डेयरी की आड़ में करते थे मवेशी को काटने का काम
पूछताछ पर पता चला कि मूूलत: दरभंगा बिहार का रहने वाला शाहजहां 20 साल पहले दिल्ली आया था। वह नरेला इलाके में रह रहा था। करीब आठ साल पहले उसने डेयरी खोली और इसकी आड़ में मवेशियों को काटकर बेचना शुरू कर दिया। वहीं ललित मूलत: बागपत यूपी का रहने वाला है। उसने भी डेयरी खोली और शाहजहां से मिलकर धंधे को अंजाम देने लगा।
आवारा मवेशियों को देखकर लगाते थे बेहोशी का इंजेक्शन
आरोपियों से पता चला कि वह एक बार किसी वाहन को लेकर घर से निकलते थे। इस दौरान वह लावारिस मवेशियों की रेकी करते थे। ऐसे मवेशियों को बेहोशी का इंजेक्शन लगा देते थे। मवेशियों के बेहोश होने के बाद वह उसे अपनी गाड़ी में लादकर सुनसान स्थान पर ले जाते थे। जहां वह मवेशियों को काट देते थे। फिर मांस को उसके विक्रेताओं को बेच देते थे।
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