कोरोना महामारी और प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण दिल्ली के 225 साल के रावण दहन के इतिहास में पहली बार रावण के पुतले का वर्चुअल दहन किया जाएगा। इस दौरान लोग अपनी सुविधा के अनुसार घर में बैठकर टीवी स्क्रीन पर रावण दहन देख सकेंगे। इसका प्रभाव रावण, कुंभकर्ण एवं मेघनाथ के पुतलों की लंबाई पर भी पड़ गया है। दशहरा के अवसर पर शुक्रवार को रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का कद करीब दो तिहाई कम होगा। इसके अलावा तमाम रामलीला कमेटियों के परिसरों में पुतले जलने से पहले न तो गर्दन घूमाएंगे और न ही बार-बार हंसेंगे। इतना ही नहीं, धू-धू कर जलने के दौरान पुतलों में पटाखों के छुड़ने की आवाज भी नहीं आएगी। दरअसल एक ओर रामलीला कमेटी हाईटेक पुतले तैयार नहीं कराए है, वहीं दूसरी ओर समस्त रामलीला कमेटी रावण, कुंभकर्ण व मेघनाथ के पुतले नहीं जला रही है।
कोरोना महामारी की रोकथाम के सिलसिले में कड़े दिशा निर्देश जारी होने के कारण इस बार कुछ ही रामलीला कमेटी रामलीला का मंचन करा रही है। इसके अलावा प्रशासन की सख्ती की वजह से ये समस्त रामलीला कमेटी भी दशहरा के अवसर पर रावण, कुंभकर्ण व मेघनाथ के पुतले नहीं जलाएगी। अभी तक लालकिला मैदान में रामलीला मंचन करा रही लवकुश रामलीला कमेटी ने ही पुतले जलाने का ऐलान किया है, लेकिन वह 30 फुट ऊंचे पुतले जलाएगी और उसके पुतलों में पटाखे नहीं होंगे, जबकि गत वर्षों के दौरान वह 90 फुट ऊंचे पुतले जलाती थी।