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कोरोना का असर: रावण का पुतला न गर्दन घुमाएगा और न ही ठहाके लगाएगा, पहली बार होगा वर्चुअल रावण दहन

Tue, 12 Oct 2021 11:12 PM IST
प्राची प्रियम विनोद डबास, नई दिल्ली

सार

पुतले बनाने की एशिया की सबसे बड़ी मंडी के रूप में पहचान बना हो चुके पश्चिम दिल्ली स्थित तीतारपुर गांव के अलावा द्वारका, ककरौला मोड़ पर इस बार नाममात्र ही पुतले बनाए गए है। यहां अधिकतर कारीगरों ने गली मोहल्लों में बच्चों की ओर से जलाए जाने वाले छोटे पुतले बनाए है।
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रावण दहन - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कोरोना महामारी और प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण दिल्ली के 225 साल के रावण दहन के इतिहास में पहली बार रावण के पुतले का वर्चुअल दहन किया जाएगा। इस दौरान लोग अपनी सुविधा के अनुसार घर में बैठकर टीवी स्क्रीन पर रावण दहन देख सकेंगे। इसका प्रभाव रावण, कुंभकर्ण एवं मेघनाथ के पुतलों की लंबाई पर भी पड़ गया है। दशहरा के अवसर पर शुक्रवार को रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का कद करीब दो तिहाई कम होगा। इसके अलावा तमाम रामलीला कमेटियों के परिसरों में पुतले जलने से पहले न तो गर्दन घूमाएंगे और न ही बार-बार हंसेंगे। इतना ही नहीं, धू-धू कर जलने के दौरान पुतलों में पटाखों के छुड़ने की आवाज भी नहीं आएगी। दरअसल एक ओर रामलीला कमेटी हाईटेक पुतले तैयार नहीं कराए है, वहीं दूसरी ओर समस्त रामलीला कमेटी रावण, कुंभकर्ण व मेघनाथ के पुतले नहीं जला रही है।

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कोरोना महामारी की रोकथाम के सिलसिले में कड़े दिशा निर्देश जारी होने के कारण इस बार कुछ ही रामलीला कमेटी रामलीला का मंचन करा रही है। इसके अलावा प्रशासन की सख्ती की वजह से ये समस्त रामलीला कमेटी भी दशहरा के अवसर पर रावण, कुंभकर्ण व मेघनाथ के पुतले नहीं जलाएगी। अभी तक लालकिला मैदान में रामलीला मंचन करा रही लवकुश रामलीला कमेटी ने ही पुतले जलाने का ऐलान किया है, लेकिन वह 30 फुट ऊंचे पुतले जलाएगी और उसके पुतलों में पटाखे नहीं होंगे, जबकि गत वर्षों के दौरान वह 90 फुट ऊंचे पुतले जलाती थी।

उधर पूर्वी दिल्ली के इंद्रप्रस्थ एक्सटेंशन में रामलीला मंचन करा रही श्री रामलीला कमेटी के प्रमुख सुरेश बिंदल ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण उन्होंने पुतले नहीं जलाने का निर्णय लिया है। वहीं अशोक विहार फेस-दो में एक दिन में संपूर्ण रामलीला का मंचन करा चुकी आदर्श रामलीला कमेटी भी पुतले नहीं जला रही है। कमेटी के प्रवक्ता प्रवीन कुमार ने बताया कि पुतला दहन कार्यक्रम में भारी संख्या में आने वाले लोगों को संभालना मुश्किल है। इसी तरह ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित इस्कॉन मंदिर के सभागार में एक दिन में ही संपूर्ण रामलीला कराने वाली श्री धार्मिक लीला कमेटी के प्रवक्ता रवि जैन का कहना है कि जब 10 दिन तक रामलीला का मंचन ही नहीं कराया तो पुतले जलाने का कोई औचित्य नहीं है।

करोलबाग स्थित अजमल खां पार्क में रामलीला का मंचन करा रही श्री सनातन धर्म लीला समिति के प्रवक्ता प्रवीन कपूर ने बताया कि पुतले तो तैयार करा लिए गए है, लेकिन अभी तक पुतले जलाने का निर्णय नहीं हुआ है, क्योंकि प्रशासन की सख्ती बढ़ती जा रही है। इस कारण कमेटी कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहती है।
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पुतलों की मंडी है वीरान
पुतले बनाने की एशिया की सबसे बड़ी मंडी के रूप में पहचान बना हो चुके पश्चिम दिल्ली स्थित तीतारपुर गांव के अलावा द्वारका, ककरौला मोड़ पर इस बार नाममात्र ही पुतले बनाए गए है। यहां अधिकतर कारीगरों ने गली मोहल्लों में बच्चों की ओर से जलाए जाने वाले छोटे पुतले बनाए है। कुछ ही कारीगरों ने बड़े पुतले बनाए है, लेकिन उनकी ऊंचाई भी 25 फुट से ऊंची नहीं है। 

उन्होंने हाईटेक के बजाए साधारण पुतले बनाए है। यहां पुतले बनाने वाले महेंद्र व सतपाल ने बताया कि इस बार हरियाणा के विभिन्न शहरों में रामलीला मंचन करा रही कमेटियों के ऑर्डर पर पुतले बनाए हैं। उनसे दिल्ली की किसी भी रामलीला कमेटी ने पुतले बनवाने के लिए संपर्क नहीं साधा।
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