दिल्ली विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष(2022) में विद्यार्थियों को एक नया कॉलेज मिलने जा रहा है। महरौली स्थित फतेहपुर बेरी के भाटी कलां गांव में यह कॉलेज खोलने की तैयारी की जा रही है। रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान को इस कॉलेज का शिलान्यास करना था। किन्हीं कारणों से इस शिलान्यास कार्यक्रम को रद कर दिया गया है।
40 बीघा जमीन पर खुलने वाले इस कॉलेज का नाम तय होना बाकी है। डीयू की एकेडेमिक व एग्जिक्यूटिव काउंसिल में कॉलेज के नाम को फाइनल किया जाएगा। कॉलेज खोलने जल्द ही गाइडलाइंस तैयार हो जाएंगी ।
डीयू रजिस्ट्ररार डॉ विकास गुप्ता ने कहा कि डीयू अगले साल अपने सौ वर्ष पूरे करने जा रहा है। इस मौके पर इमारत तैयार कर पहले वर्ष केविद्यार्थियों का प्रवेश लिया जाएग। दक्षिण पश्चिम दिल्ली में बनने वाले इस कॉलेज केलिए जमीन का आवंटन जुलाई 2019 में हो चुका है।
उपराज्यपाल अनिल बैजल के अनुमोदन एवं अनुशंसा पर कॉलेज की स्थापना केलिए जिला प्रशासन द्वारा जमीन उपलब्ध कराई गई है। इस कॉलेज के खुलने से दिल्ली-एनसीआर के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को लाभ होगा। इसकेसाथ ही यहां एक सुविधा केंद्र भी होगा जो कि विद्यार्थियों के दाखिला, परीक्षा व अन्य कार्यों केलिए सुविधा प्रदान करेगा। इसके खुलने से एक जगह से दूसरी जगह चक्कर नहीं लगाने होंगे।
दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को अब छ: माह पहले की माक्र्सशीट खोने या खराब होने पर उन्हें ङ्क्षचंता नहीं करनी पड़ेगी। विद्यार्थियों को अब नौ साल पहले की डुप्लीकेट माक्र्सशीट ऑनलाइन ही मिल जाएगी। डीयू विद्यार्थियों को वर्ष 2012 के बाद की माक्र्सशीट डाउनलोड करने की सुविधा प्रदान करने जा रहा है। अब तक छ: माह पुरानी माक्र्सशीट ही प्राप्त की जा सकती थी। इसकेलिए उन्हें परीक्षा शाखा के चक्कर लगाने पड़ते थे। इस सुविधा के मिलने से विद्यार्थियों को काफी आसानी हो जाएगी।
डीयू परीक्षा शाखा डीन प्रो डी.एस रावत ने बताया कि हम विद्यार्थियों को 2012 के बाद की डुप्लीकेट माक्र्सशीट ऑनलाइन देने की सुविधा देने जा रहे हैं। अभी तक की व्यवस्था के अनुसार यदि विद्यार्थी की माक्र्सशीट खो गई, प्रिंट आउट खराब हो गया या फिर पीडीएफफ सेव नहीं किया तो वह केवल छ: माह पहले तक की डुप्लीकेट माक्र्सशीट प्राप्त कर सकते थे। जबकि इससे पहले की डुप््लीकेट माक्र्सशीट लेने के लिए उन्हें परीक्षा शाखा आना पड़ता है। उन्हें इसकेलिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। यहां आने से समय और ऊर्जा की बर्बादी होती थी। हम चाहते हैं कि विद्यार्थियों को सब कुछ घर बैठे ऑनलाइन ही मिल जाए।
पहले की तरह विद्यार्थियों को डुप्लीकेट माक्र्सशीट प्राप्त करने के लिए 500 रुपये शुल्क का भुगतान करना होगा। यह प्राप्त करने के लिए उन्हें रोल नंबर, कॉलेज का नाम, जन्म तिथि को डालना होगा। उसकेबाद उनसे किस वर्ष व किस सेमेस्टर की माक्र्सशीट चाहिए यह पूछा जाएगा।नई व्यवस्था के तहत वर्ष 2012 के बाद की किसी भी सेमेस्टर की माक्र्सशीट को डाउनलोड किया जा सकता है। वर्ष 2012 से पहले मैनुअल रिजल्ट मिलता था इसलिए उस दौरान के लिए सुविधा प्रदान करना मुश्किल है।
डीयू में यूजी कोर्सेज में पंजीकरण का आंकड़ा करीब डेढ़ लाख पहुंचा
दिल्ली विश्वविद्यालय में यूजी कोर्सेज में दाखिले के लिए दो अगस्त से शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया में रिकॉर्ड पंजीकरण हो रहे हैं। सात दिनों की आवेदन प्रक्रिया में पंजीकरण का आंकड़ा करीब डेढ़ लाख पहुंच गया है। जबकि आवेदन प्रक्रिया समाप्त होने में अभी 24 दिन बाकी हैं। जिस रफ्तार से पंजीकरण हो रहा है उससे एक-एक सीट पर दावेदारी बढ़ती जा रही है। शनिवार शाम छ: बजे तक 1, 45, 712 पंजीकरण हो गए। वहीं 26 जुलाई से शुरू हुई पीजी आवेदन की रेस केतहत शनिवार शाम तक 96, 264 पंजीकरण हो गए। जबकि एमफिल-पीएचडी के लिए 13, 490 पंजीकरण हो गए। पीजी, एमफिल-पीएचडी के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 21 अगस्त है।