ड्रग्स की पोटली, टूथब्रश और सुई के बाद अब डॉक्टरों ने पेट से साढ़े छह इंच लंबा मोबाइल फोन भी निकाल लिया। बिना किसी चीर-फाड़ किए डॉक्टरों ने विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हुए एंडोस्कोपी के जरिए फोन को निकाल दिया।
हाल ही में तिहाड़ जेल में बंद एक कैदी ने प्रशासन से बचने के लिए मोबाइल फोन निगल लिया था। जेल से उसे डीडीयू अस्पताल भर्ती कराया गया लेकिन वहां से मरीज को जीबी पंत अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी तकनीक की मदद लेकर मोबाइल फोन बाहर निकाला। डॉक्टरों ने जब मोबाइल फोन का आकार पैमाने से नापा तो यह करीब साढ़े छह इंच लंबा और तीन इंच चौड़ा फोन था।
अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव व डॉ. मनीष तोमर ने बताया कि उनकी टीम अब तक ऐसे करीब 10 मामले देख चुकी है। अक्सर जेल में बंद कैदी कभी फोन तो कभी इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नशीले पदार्थ की पोटलियां निगल लेते हैं। इन्हें बाहर निकालने के लिए उनके पास बगैर किसी ऑपरेशन का अनुभव है।
इसी तरह का एक मामला बीते 15 जनवरी को अस्पताल आया। डॉ. सिद्धार्थ ने यह जानकारी देते हुए बताया कि अस्पताल आने के बाद उन्हें पता चला कि मरीज ने मोबाइल फोन निगल लिया है। वे कुछ ही मिनट में पूरा मामला समझ गए और उन्होंने मरीज की एंडोस्कोपी करने का फैसला लिया। एंडोस्कोपी में लगे कैमरा के जरिए उन्होंने फोन की जगह को देख लिया और फिर एक अलग से पाइप लगाकर फोन को धीरे धीरे खींचते हुए बाहर निकाल लिया। इसी जब पैमाने से नापा गया तो यह फोन साढ़े छह से थोड़ा अधिक लेकिन सात इंच से थोड़ा कम लंबा था।