अब आग लंबे समय तक जलेगी
गाजीपुर लैंडफिल साइट के सबसे पास में स्थित घड़ौली गांव के बुजुर्गों की मानें तो अब ये आग लंबे समय तक जलेगी। करीब 72 साल के बुजुर्ग कमल कमल किशोर ने कहा कि इस बार आग कूड़े के पहाड़ के सबसे ऊपरी हिस्से में लगी है। ऊपर लगी आग को बुझाया नहीं जा सका, तो अब आग को मलबे के नीचे दबाया जा रहा है। ऐसे में कचरे से दबी आग अब सुलगेगी और जब इसे गर्म हवा का साथ मिलेगा तो धधक कर जलने लगेगी।
हर साल गर्मियों में लगती है आग
स्थानीय नागरिक सुनील चौधरी ने बताया कि गाजीपुर लैंडफिल साइट पर हर साल गर्मियों में आग लग जाती है। लेकिन इस साल आग ज्यादा तेज लगी है। उन्होंने बताया कि कूड़े में आग लगने के बाद सोमवार शाम को उनके गांव के लोगों ने धुएं के गुबार से परेशान होकर अपने घरों के खिड़की दरवाजे बंद कर लिए। फिर भी घर के अंदर रहा नहीं जा रहा था। घर के बाहर धुंध सी छा गई थी। अभी भी जब गांव की तरफ हवा बह रही है, तो हालत खराब हो जा रहा है।
नया रिकार्ड बनाएगी इस बार लगी आग
दर्ज रिकार्ड के अनुसार करीब दो साल पहले 24 नवम्बर 2020 में गाजीपुर लैंडफिल साइट पर तेज आग लगी थी। तब ये आग पांच दिन बाद बुझाई जा सकी थी। सुनील चौधरी की मानें तो इस बार लैंडफिल साइट की आग पर सबकी नजर है। उन्होंने पूरे दावे के साथ कहा है कि देखिए इस बार की आग रिकार्ड बनाएगी और पूरी गर्मी लैंडफिल साइट से धुआं निकलता नजर आएगा। इसको कोई बुझा नहीं पाएगा।
नोएड़ा तक बन रहा दमघोंटू माहौल
तीन दिन से घड़ौली, गाजीपुर, कोंडली और यूपी बॉर्डर पर स्थित नोएडा सेक्टर- 11, 12 और 13 में रहने वाले लोग धुएं की मार झेल रहे हैं। यहां रात में हालत और गंभीर हो जाती है। मौसम में नमी आने के बाद हवा के वातावरण में मिश्रित धुआं स्थिर हो जाता है। इससे यहां दमघोंटू माहौल बन जाता है।
गाजीपुर लैंडफिल साइट पर लगी आग को लेकर दिल्ली सरकार ने पूर्वी निगम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही घटना के समय मौजूद कर्मचारियों व अधिकारियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने आग लगने के कारणों को लेकर रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें निगम की लापरवाही बताई गई है।
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि साइट पर बायो माइनिंग की प्रक्रिया चल रही है, जिससे इस तरह की आग लगने की संभावना कम हो सके, लेकिन साइट पर 25 के बजाय केवल 21 ट्रोमेल मशीन ही काम करती पाई गईं। साथ ही एंटी स्मॉग गन भी काम नहीं कर रही थी। लैंडफिल साइट की निगरानी के लिए लगाए गए 24 सीसीटीवी कैमरों में से सिर्फ 17 काम करते पाए गए।