श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन (एसपीएमआरएम) इस वर्ष दिसंबर में समाप्त हो जाएगा। मिशन में राज्यों की उम्मीद के हिसाब से रुचि न लिए जाने पर केंद्र सरकार ने इसके अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए इस वर्ष दिसंबर तक ही राज्यों को मदद देने का फैसला किया है। मिशन के अंतर्गत अब तक 27,716 करोड़ रुपये के निवेश प्रोजेक्ट को मंजूरी दी जा चुकी है। इसमें 17 हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। सीजीएफ के रूप में राज्यों को करीब 3855 करोड़ रुपये केंद्र से सीधे मिलने बाकी हैं। अब केंद्र सरकार सिर्फ दिसंबर तक पूरे होने वाले प्रोजेक्ट पर खर्च होने वाली राशि ही देने जा रही है। दिसंबर के बाद पूरे होने वाले प्रोजेक्ट को राज्य अपने स्तर पर ही आगे बढ़ा सकेंगे।
एसपीएमआरएम को वर्ष 2015-16 में वर्ष 2019-20 तक के लिए शुरू किया गया था। इस मिशन के अंतर्गत 300 ग्रामीण क्लस्टर को शहरी क्लस्टर की तरह विकसित किए जाने का लक्ष्य था, मगर मूल मिशन अवधि मार्च, 2020 में ही खत्म हो गई और क्लस्टर की मंजूरी व डीपीआर की स्वीकृति जैसे तमाम कार्य लंबित पड़े थे। लिहाजा, मिशन को मार्च, 2021 तक के लिए अंतरिम विस्तार दे दिया गया। सूत्रों का कहना है, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मिशन के क्रांतिकारी उद्देश्य लेकिन धीमी प्रगति का आकलन करने के बाद इसे तीन वर्ष (मार्च, 2024 तक) और बढ़ाने की वकालत की थी।
मगर, सरकार की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने 26 अगस्त, 2021 की अपनी बैठक में इस योजना को समाप्त करने का सुझाव दिया। मंत्रालय व ईएफसी की इस परस्पर विरोधी राय के बाद से ही मिशन का भविष्य अधर में लटका हुआ था। लंबे विचार-विमर्श के बाद अब तय हुआ है कि मिशन के जो कार्य दिसंबर, 2022 तक पूरे हो सकते हैं, उनके लिए ही केंद्र मदद करेगा। इसके बाद कोई मदद नहीं दी जाएगी। मंत्रालय अब ऐसे प्रोजेक्ट की पहचान करने में जुटा है, जो दिसंबर तक पूरे हो जाएंगे।
सीजीएफ मिलनाहो जाएगा बंद
इन चयनित क्लस्टर के विकास में 70% राशि केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के कन्वर्जेंस (अभिसरण) से खर्चने की व्यवस्था है। ग्रामीण विकास मंत्रालय क्रिटिकल गैप फंडिंग (सीजीएफ) के रूप में कुल निवेश राशि का 30% तक उपलब्ध कराता है। यह गैर आदिवासी क्षेत्रों में अधिकतम 30 करोड़ व जनजातीय क्षेत्रों में 15 करोड़ रुपये तक है।
लक्ष्य 300 क्लस्टर : 298 स्वीकृत, 291 का एक्शन प्लान तैयार
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने शहरी विकास की दहलीज पर खड़े ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए ‘आत्मा गांव की-सुविधाएं शहर की’ टैगलाइन के साथ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ग्रामीण शहरी मिशन की शुरुआत की थी।
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मिशन के अंतर्गत देश भर में ग्रामीण व जनजातीय क्षेत्रों से 300 क्लस्टर चयनित किए गए। इन 300 क्लस्टर में 298 मंजूर किए जा चुके हैं। इनमें 291 क्लस्टर के एक्शन प्लान तैयार हैं और 282 के डीपीआर को मंजूरी मिल चुकी है।
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इन क्लस्टर को विकास व रोजगार के साथ बेहतर जीवन की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए आर्थिक, सामाजिक और भौतिक रूप से सक्षम बनाने का लक्ष्य है।
दिसंबर के बाद केंद्र सरकार नहीं करेगी मदद
व्यय वित्त समिति ने राज्यों द्वारा मिशन को पूरे उत्साह से अंगीकृत न किए जाने का हवाला देकर इसे इस वर्ष दिसंबर तक ही वित्तीय मदद उपलब्ध कराने पर सहमति दी है। इसके बाद केंद्र इसमें मदद नहीं करेगा। राज्यों को यह सलाह दी जा रही है कि वे दिसंबर के बाद पूरे होने वाले प्रोजेक्ट को अन्य योजनाओं के समन्वय से पूरा कर सकते हैं।
- स्मृति सरन, संयुक्त सचिव ग्राम्य विकास मंत्रालय