हाईकोर्ट ने कहा कि शारीरिक संबंधों के मामले में महिला के शिक्षक होने का तर्क देने से दुष्कर्म का आरोपी राहत पाने का हकदार नहीं है। अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए महिला से विवाह का वायदा कर दुष्कर्म के आरोपी भारतीय नौसेना के एक अधिकारी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि पीड़िता एक शिक्षित महिला है, लेकिन वह भी एक शिक्षित व्यक्ति है जिसने उससे धोखाधड़ी की है। तथ्यों से पता चलता है कि महिला ने आरोपी से इस आशा के साथ शारीरिक संबंध बनाए कि वह उससे हर कीमत पर विवाह करेगा। यह उसके लिए ऐसा सोचने के लिए तर्कहीन नहीं है।
अदालत ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि याचिकाकर्ता भारतीय नौसेना में वरिष्ठ अधिकारी हैं, इसलिए महिला की तुलना में अधिक जिम्मेदार व्यवहार दिखाने की आवश्यकता थी। क्या उसे इस बहाने उसकी गरिमा के साथ खेलने की अनुमति दी जा सकती है कि वह सिर्फ मनोरंजन के लिए उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता है और बाद में दावा करता है कि वह उससे पैसे ऐंठ रही है। इस तरह के आरोप का अगर सबूत नहीं है तो उसे उसका अपमान कर रहा हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने दिसंबर 2019 को महिला को रात के खाने के लिए बाहर बुलाया व शारीरिक संबंध बनाए। महिला आरोप है कि आरोपी ने उसके ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाया व अपने कमरे में ले जाकर दुकर्म किया। महिला ने कहा कि होश में आने के बाद जब उसने आपत्ति जताई तो आरोपी ने विवाह का वायदा किया। आरोपी ने दिसंबर 19 से जनवरी 20 के दौरान कई बार विवाह का वायदा कर शारीरिक संबंध बनाए।