कबाड़ के कलपुर्जों से कलाकारी कर बुलेट की चाल बदलने वाले सरकारी स्कूल में नौवीं कक्षा के छात्र ने पापा के लिए ई-बाइक, मम्मी के लिए ई-स्कूटी बनाने के बाद अब हाईब्रिड की ओर कदम बढ़ाए हैं।
छोटी सी उम्र में बड़ा कमाल करने वाले इस छात्र ने अब ऐसी तकनीक पर काम करना शुरू किया है, जिससे ई-स्कूटी या ई-बाइक की बैटरी को बार-बार चार्ज ना करना पड़े। वह इंजन की हीट से बैटरी को चार्ज करने की तकनीक को विकसित करने पर काम कर रहे हैं। हालांकि पैसे के अभाव में रिसर्च आगे बढ़ाने में थोड़ी देर हो रही है।
सुभाष नगर स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय के नौवीं छात्र राजन शर्मा ने बताया कि अभी कुछ दिनों पहले उन्होंने एटरनो स्कूटर को ई-स्कूटी में बदला है। इसमें ज्यादा लागत नहीं आई क्योंकि यह स्कूटर उनके घर में ही था। जिसे उन्होंने ई-स्कूटी में बदल दिया है। बैटरी से चलने वाली इस ई-स्कूटी को उन्होंने अपनी मां के लिए तैयार किया है जिससे उनकी मां को कहीं जाने में दिक्कत ना हो। इससे पहले वह कबाड़ के कलपुर्जों से रॉयल इनफील्ड को ई-बाइक में बदल चुके हैं। इसके बाद वे काफी सुर्खियों में आ गए हैं। इस कमाल के बाद अभिनेता सोनू सूद ने उनसे लाइव बात भी की थी।
राजन की कलपुर्जों में काफी रुचि है। राजन ने पहले लॉकडाउन में ई-साइकिल से प्रयोग शुरू किया था, जिसमें सफल नहीं रहने पर बाद में ई-बाइक बनाई थी। राजन के पिता दशरथ शर्मा ने बताया कि सोनू सूद ने लाइव बातचीत में सवाल किया था कि पिता के लिए ई बाइक बना दी, अब मां के लिए क्या बनाओगे।
तब राजन ने जवाब दिया था कि वह मां के लिए ई स्कूटी बनाएंगे। जिस पर उन्होंने दो माह पहले काम करना शुरू कर दिया था। दशरथ ने बताया कि वह घर में रखे एटरनो स्कूटर को 3500 रुपये में बेचना चाह रहे थे लेकिन राजन ने बेचने से मना कर दिया क्योंकि वह इसमें बैटरी लगाकर ई-स्कूटी बनाना चाहते थे। उनका दावा है कि यह स्कूटी ढाई घंटे के रिचार्ज में 70 किलोमीटर तक चल सकती है।
पैसे का अभाव रिसर्च में आ रहा आडे़
राजन कहते हैं कि अभी ई-बाइक व ई-स्कूटी में बार-बार बैटरी खत्म होने पर उसे चार्ज करना पड़ता है। इससे समय और बिजली की खपत होती है। किसी गाड़ी का इंजन गर्म हो जाता है तो उसे पानी डाल कर ठंडा करना पड़ता है। अब उनका प्रयास है कि इंजन की गर्मी से बैटरी को चार्ज किया जाए जिससे बिजली की भी खपत ना हो और बार-बार चार्ज करने के झंझट से भी मुक्ति मिले। बीते शुक्रवार ही राजन के मिड टर्म एग्जाम समाप्त हुए हैं। अब वह इस पर काम करना शुरू करेंगे। हालांकि पैसे का अभाव उनकी इस रिसर्च में आडे़ आ रहा है। हालांकि स्कूल व वहां के शिक्षक उनकी मदद कर रहे हैं।
कुछ कंपनियों ने रुचि दिखाई
राजन के पिता ने बताया कि बेंगलुरु की एक कंपनी ने उनके हुनर को देखते हुए बातचीत शुरू की है। अभी राजन छोटे हैं इसलिए कहा कि 18 साल का होने पर वह संपर्क करेंगे।