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दिल्ली के वित्त मंत्री का दावा : 2047 तक राजधानी के प्रति व्यक्ति की आय सिंगापुर के बराबर होगी

Wed, 17 Nov 2021 06:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

मनीष सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार से है सहयोग की दिल्ली सरकार को उम्मीद।
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मनीष सिसोदिया - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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केजरीवाल सरकार का लक्ष्य 2047 तक दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय सिंगापुर के बराबर करने का है। पिछले 6 वर्षों में दिल्ली की विकास दर बढ़कर 11-12 फीसदी के बीच पहुंच गई है। दिल्ली में प्रति व्यक्ति आय भी पूरे देश की तुलना में 3 गुणा अधिक है जबकि देश की जीडीपी में 4.4 फीसदी योगदान है।

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उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में सोमवार को हुई वर्चुअल बैठक में ये बातें कहीं। बैठक में देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर करने और राज्यों में विकास की रफ्तार को तेज करने पर मंथन किया गया। इस मौके पर सिसोदिया ने दिल्ली के चहुंमुखी विकास की राह में जमीन की कमी को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए केंद्र सरकार से इस दिशा में दिल्ली सरकार के सहयोग की उम्मीद है। 

उपमुख्यमंत्री ने साझा किया कि दिल्ली, देश के सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाले राज्यों में से एक बताते हुए कहा कि दिल्ली सरकार आगे भी कारोबार के लिए बेहतर माहौल और सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। दिल्ली की आबादी देश की कुल आबादी का 1.49 प्रतिशत है। बावजूद इसके विकास दर और जीडीपी में दिल्ली का 4.4 फीसदी का योगदान है। दिल्ली में प्रति व्यक्ति आय 3 लाख 54 हजार है। सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुएदिल्ली के लिए विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं। देश की आजादी की 100 वीं सालगिरह पर 2047 तक दिल्ली की प्रतिव्यक्ति आय सिंगापुर के बराबर पहुंचाया जाएगा। 
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जीडीपी में सर्विस सेक्टर का 85 फीसदी योगदान
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली की जीडीपी में सर्विस सेक्टर का योगदान 85 फीसदी है7हम दिल्ली के विकास के लिए सभी पहलुओं पर काम किया जा रहा है। 

रानीखेड़ा में बनेगा विश्वस्तरीय मैन्युफैक्चरिंग हब
रानीखेड़ा में 147 एकड़ भूमि पर एक विश्व स्तरीय मल्टीलेवल मैन्युफैक्चरिंग हब तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। दिल्ली सरकार बापरोला में करीब 55.20 एकड़ जमीन पर एक नॉलेज बेस्ड इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करेगी। कंझावाला में भी 920 एकड़ जमीन में इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप विकसित करने जा रही है। इस प्रस्तावित परियोजना 920 एकड़ के क्षेत्र में फैली एक प्रमुख ग्रीनफील्ड परियोजना होगी।

सड़कें स्मार्ट बनाने के लिए 11 हजार करोड़ की जरूरत
सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली की सड़कों को विश्वस्तरीय बनाने का दिल्ली सरकार काम कर रही है730 मीटर से ज्यादा चौड़ी 540 किमी सड़कें है7हमारी कोशिश है कि विकसित देशों के शहरों की तर्ज पर दिल्ली की सड़कें भी बनाई जाएं। इन सड़कों को स्मार्ट बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने योजना तैयार की है। इसके लिए 11000 करोड़ रुपयों की जरुरत है7दिल्ली सरकार अपने फंड  से इस परियोजना पर काम कर रही है मगर केंद्र सरकार से भी इसमें सहयोग की अपेक्षा करती है। 

जमीन की कमी सबसे बड़ी चुनौती, केंद्र और डीडीए से सहयोग की उम्मीद
सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में 29 नियोजित औद्योगिक क्षेत्र और 4 फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स हैं। 25 नॉन-कांफर्मिंग इंडस्ट्रियल क्लस्टर हैं, मगर हकीकत में वहां सभी गतिविधियां चल रही हैं। केंद्र सरकार इसे जल्द से जल्द कंफ़र्म करे ताकि इन्हें भी दिल्ली के विकास मे शामिल किया जा सके। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार को साथ मिलकर काम करना होगा7हमें केंद्र सरकार और डीडीए का सहयोग चाहिए7

भविष्य में 4000-5000 ई बसें खरीदने की योजना  
दिल्ली को प्रदुषण मुक्त करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है7 इस दिशा में केजरीवाल सरकार लगातार काम कर रही है7सरकार ने इसके लिए ई-व्हीकल पालिसी बनाई है, जिसे हकीकत में बदलने की सभी कोशिशें जारी हैं। विकसित देशों में इतनी बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक वाहन इसलिए हैं क्योंकि चार्जिंग स्टेशन की कमी नहीं है। दिल्ली को भी सरकार ई-व्हीकल कैपिटल बनाना चाहती है। इसके लिए दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और डीडीए से सहयोग चाहती है क्योंकि दिल्ली में डीडीए के पास जमीन है7प्रदूषण पर शिकंजा कसने के लिए दिल्ली सरकार ने 1000 ई-बसों को खरीदा है7भविष्य में दिल्ली सरकार 4000-5000 ई-बसें खरीदने की योजना बना रही है और इसके लिए भी केंद्र सरकार का सहयोग अपेक्षित है7

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केजरीवाल सरकार खड़े कर रही है अस्पतालों का जाल, जमीन की है जरुरत

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दिर्ल्ली के लोगों को स्वस्थ रखने के लिए दिल्ली सरकार प्रयासरत है7दिल्ली में सरकार के पास उपलब्ध जमीन पर हम नए अस्पतालों का निर्माण कर रहे है, मगर भविष्य में किसी भी महामारी से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। इसके लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करना होगा। डीडीए ने पिछले कई सालों में ट्रस्ट को अस्पताल बनाने के लिए जमीनें दी है। मगर इनका उपयोग नहीं किया जा सका। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से हस्तक्षेप की जरूरत है7 केंद्र सरकार इन जमीनों का ऑडिट करवाए। ट्रस्ट की जमीनों का अगर अस्पताल बनाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है तो दिल्ली सरकार विश्व स्तरीय अस्पताल बनाने के लिए तैयार है। इससे दिल्ली के विकास को नई गति मिलेगी। 

नए स्कूल-कॉलेज के लिए चाहिए जमीन
सिसोदिया ने कहा कि पूरे देश में 12वीं पास केवल 20 बच्चे ही उच्च शिक्षा के लिए यूनिवर्सिटी में जाते है7 दिल्ली में पिछले 5-6 सालों में यह आंकड़ा 45 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उच्च शिक्षा संस्थानों में सीटों को 4 गुणा बढ़ोतरी की गई है7 दिल्ली में नए कॉलेज बनाने के लिए जमीन की आवश्यकता है7किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी के लिए फिलहाल डीडीए से ऊंची कीमतों पर जमीन खरीदनी होती है7केंद सरकार के हस्तक्षेप से डीडीए अपनी नीतियों में बदलाव करें। इससे दिल्ली में उच्च शिक्षा को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी7हमारा प्रयास रहेगा कि 12वीं पास करने वाले सभी छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करें7

दिल्ली के हर कोने में पहुंच रही है मेट्रो
सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण के 6 कोरिडोर में से 3 को अब तक मंजूरी नहीं मिली है7 उन्होंने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि शेष तीन कॉरिडोर भी जल्द मंजूरी दी जाए7इससे दिल्ली में परिवहन सुविधाओं को और बेहतर करना संभव होगा। इससे लोगों की सहूलियतें भी बढ़ेंगी। 

स्टार्टअप को दे रही है बढ़ावा 
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि स्टार्टउप के मामले में दुनिया के टॉप 100 शहरों में शुमार है दिल्ली7 इनोवेशन के मामले में देश में दिल्ली पहले नंबर पर है और केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिए नई स्टार्टअप पालिसी बनाई है। जबतक पूरे देश में सभी राज्य संयुक्त रूप से एक स्टार्टअप पालिसी नहीं बनाएंगे, आगे बढ़ने में मुश्किलें पेश आएंगी। नौजवानों को रोजगार दिलाना केजरीवाल सरकार की प्राथमिकता है। इज ऑफ़ डूइंग बिजनेस में दिल्ली अग्रणी है। 
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