फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डार्क स्काय सेंक्चुअरी : तारों के दीदार के लिए लद्दाख में बनेगा विहार, खगोल पर्यटन की खातिर प्रोत्साहन योजना

Sun, 31 Oct 2021 06:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लेह

सार

यहां घनघोर काली रात के आकाश को निहारने की गतिविधियां आयोजित हो सकेंगी। इस काम में मद्रास स्थित भारतीय तारा-भौतिकी संस्थान (आईआईए) मदद करेगा।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश के उत्तरी कोने में स्थित लद्दाख के हान्ले को ‘डार्क स्काय सेंक्चुअरी’ घोषित किया जा रहा है। यहां घनघोर काली रात के आकाश को निहारने की गतिविधियां आयोजित हो सकेंगी। इस काम में मद्रास स्थित भारतीय तारा-भौतिकी संस्थान (आईआईए) मदद करेगा। यह घोषणा लद्दाख के योजना, विकास और निगरानी विभाग के प्रमुख सचिव पवन कोतवाल ने उच्चस्तरीय बैठक में की।

विज्ञापन


हान्ले में ही आईआईए की भारतीय खगोल वेधशाला भी बनी है। यह प्रकाश व इंफ्रारेड खगोल भौतिकी की विश्व की सबसे ऊंची वेधशाला है। मानवीय गतिविधियां, आबादी व प्रदूषण न के बराबर होने और विशेष भौगोलिक स्थिति के कारण यहां से आकाश को बेहद साफ दिखता है। रात में अंतरिक्ष में स्थिति संरचनाएं निहारने और खगोल अध्ययन के लिए इसे धरती की सबसे आदर्श जगहों में से एक माना जाता है। एजेंसी

ऐतिहासिक महत्व भी
हान्ले नदी घाटी स्थित यह जगह एक प्राचीन लद्दाख-तिब्बत व्यापार मार्ग भी है। यहां 17वीं शताब्दी का मठ बना है जो तिब्बति बौद्ध शाखा द्रुक्पा काग्यू से संबंधित है। बैठक में मौजूदा कर्नल पंकज सिन्हा ने डार्क स्काय सैंक्चुअरी के प्रस्ताव को लागू करने के लिए सेना द्वारा पूरा सहयोग देने की वादा किया।
विज्ञापन


इसलिए खास है हान्ले

  • रात में यहां से विभिन्न तारे, आकाशगंगाएं व तारामंडल साफ नजर आते हैं। यह बात खगोलप्रेमियों को अपनी ओर खींच रही है।
  • आईआईए की 120 एकड़ में बनी वेधशाला में दो ऑप्टिकल दूरबीनें हैं, एक दो मीटर आकार की और दूसरी गामा-रे दूरबीन है, जो खगोल अध्ययन में काम आती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें