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रोहिणी कोर्ट शूटआउट : नीतू दाबोदिया के ढेर होने के बाद उभरे थे टिल्लू और गोगी गिरोह

Sat, 25 Sep 2021 05:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

दोनों गिरोह के बीच हत्याओं की संख्या और दबदबे के कारण रहती थी तकरार। गोगी के खिलाफ हैं 30 से अधिक मामले दर्ज
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दिल्ली- रोहिणी कोर्ट शूटआउट - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अपराध की दुनिया में कुख्यात गैंगस्टर के रूप में मशहूर जितेंद्र गोगी व टिल्लू पहलवान गिरोह नीतू दाबोडिया के मरने के बाद सामने आए थे। वर्ष 2013 के अक्तूबर में स्पेशल सेल ने नीरज सहरावत उर्फ नीतू दाबोदिया को मुठभेड़ में ढेर किया था। तब से ही दोनों गिरोह अपराध की दुनिया में बढ़ते चले गए थे और एक दूसरे के दुश्मन भी बन गए थे। 

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दोनो गिरोह ने समय के साथ अपने गिरोह में कई लड़कों को शामिल करना शुरू कर दिया था, जो समय-समय पर लूट और गंभीर अपराधों को अंजाम देते थे। दोनों गिरोह के बीच अपने दबदबे, हत्याओं की संख्या व पुलिस द्वारा बदमाशों को रिहा करने के मुद्दे को लेकर टकरार चलती रहती थी। कुछ सालों के भीतर ही अपराध की दुनिया में कई गंभीर अपराध करने के कारण गोगी दिल्ली का गैंगस्टर बन गया था।

टिल्लू के गिरोह के शार्प सूटर अमित दबंग के गिरफ्तार होने के बाद दिल्ली में ऐसा कोई नहीं था जो गोगी को चुनौती दे सके। गोगी के सबसे नजदीकी कहे जाने वाले बदमाश फज्जा और मोई भी खतरनाक बदमाशों की सूची में शामिल हैं। इन दोनों बदमाशों के ऊपर कई ईनामों की घोषणा की गई थी, जिसके बाद यह तीनों नाम रोहिणी, उत्तर-पश्चिम, बाहरी और बाहरी उत्तरी दिल्ली में डर का नाम बन गए थे। 
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गोगी गिरोह के सदस्य रंगदारी, फिरौती व कार जैकिंग आदि तरह की वारदातों का अंजाम देने के लिए जाने जाते थे। वर्ष 2018 में दोनों गिरोह के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। इससे पहले 2017 में गोगी व अन्य तीन बदमाशों ने पानीपत में हरियाणवी गायक हर्षित दहिया के छाती में सात गोलियां दाग दी थी। दहिया की हत्या उनके चचेरे भाई दिनेश कराला के कहने पर की थी।

इसके लिए गोगी ने कराला से इस शर्त पर रूपये नहीं लिए थे कि वह गोगी के प्रतिद्वंदी गिरोह को खत्म करने में उनकी मदद करता। इसके बाद वर्ष 2020 में गोगी गिरोह ने टिल्लू गिरोह का साथ देने के लिए पवन ठाकुर को उसकी कार पर 48 गोलियां चलाने से भून दिया था। इसमें से 26 गोलियां लगने के कारण पवन की मौके पर ही मौत हो गई थी।

 इसके बाद गोगी गिरोह पर कई मामले दर्ज होने के साथ मकोका के तहत भी धाराएं दर्ज कर हरियाणा और दिल्ली पुलिस को आरोपियों की तलाश थी। हालांकि, पहले जेल में अधिक समय तक रहने के कारण गिरोह कई तरह से चालाकी चलकर पुलिस की गिरफ्त से बच जाता था। गिरोह में कुलदीप उर्फ फज्जा को मास्टरमाइंड के नाम से जाना जाता था जो किसी भी संपर्क के माध्यम से एजेंसियों को अपने तक पहुंचने नहीं देता था। 

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