आर्थिक अपराध शाखा ने सेना के अधिकारियों से बीमा पॉलिसी में लाभ दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी बीमा पॉलिसी पर बोनस देने का झांसा देते थे। गैंग ने सेना के 54 अधिकारियों को शिकार बनाने की कोशिश की, जिसमें 13 उनके झांसे में आ गए। आरोपियों ने इनसे 1.15 करोड़ की ठगी को अंजाम दिया। आरोपियों पर महाराष्ट्र, हैदराबाद और चंडीगढ़ में भी इसी तरह के फर्जीवाड़ा के मामले दर्ज हैं।
शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आर के सिंह बताया कि कुछ जालसाज सेना के अधिकारियों और पेंशनधारियों को फोन कर उन्हें आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड में लाभ देने का वादा किया। आरोपियों ने उन्हें उनके पॉलिसी पर तीन चार लाख रुपये देने की बात कहकर बैंक खातों में तीस से चालीस हजार रुपये जमा करने के लिए कहा। आरोपियों ने आर्मी सर्विस कोर के कर्नल जीएम खान से एक करोड़ दो लाख 24 हजार की ठगी कर ली। इसी तरह आरोपियों ने 12 और अधिकारियों से ठगी को अंजाम दिया। वर्ष 2019 में इस बाबत आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत दी गई। पुलिस ने शिकायत पर जांच शुरू की।
निरीक्षक जेएस मिश्रा के नेतृत्तव में पुलिस ने 50 से अधिक बैंक खातों की जांच की। साथ ही आरोपियों के फोन नंबर की पड़ताल की। जिस पते पर फोन नंबर लिया गया था सारे फर्जी निकले। बैंक खातों की जांच में पता चला कि आरोपियों ने फर्म के नाम से किराए के मकान के पते पर बैंक खाता खोला था। मकान मालिक से भी आरोपियों का सुराग नहीं मिला। आरोपी एटीएम के जरिए तुरंत रुपये निकाल लेते थे। इस दौरान पता चला कि एक आरोपी प्रभात कुमार सेल्फ चेक से पैसे निकाल रहा है। तकनीकी जांच करते हुए पुलिस ने प्रभात को गिरफ्तार किया। उसके निशानदेही पर पुलिस ने तीन अन्य आरोपी रूपेश कुमार, राम नरेश और राम सागर को दिल्ली, फरीदाबाद और कानपुर से गिरफ्तार कर लिया। रूपेश और प्रभात रिश्ते में साले बहनोई हैं।
पहले कॉल सेंटर चलाता था मुख्य आरोपी
जांच में पता चला कि फरीदाबाद का रहने वाला रूपेश गैंग का सरगना है। वह पहले दोस्त संजय राय के साथ कॉल सेंटर चलाता था। संजय राय की मौत हो चुकी है। रूपेश को कॉल सेंटर में काम करने के दौरान बीमा के बारे में अच्छी जानकारी हो गई थी। आरोपी 2 फीसदी कमीशन पर बैंक खाता किराए पर लेता था। इससे पहले वह फर्जीवाड़ा में रायबरेली, फरीदाबाद और अलीगढ़ में गिरफ्तार हो चुका है। प्रभात कुमार मोतिहारी, बिहार का रहने वाला है।
वह 12वीं पास है और रायगढ़ की एक फैक्ट्री में सुपरवाइजर था। बाद में, उसने अपने जीजा रूपेश से किसी अन्य नौकरी दिलाने के लिए कहा। रूपेश ने उसे फर्जीवाड़े के धंधे से जोड़ लिया। वह रूपेश के निर्देश पर बैंक से चेक के जरिए रुपये निकालता था। राम नरेश और राम सागर सागवार उन्नाव यूपी के रहने वाले हैं। दोनों ने फर्जीवाड़ा के लिए दिल्ली एनसीआर के अलावे गुवाहाटी के अलग अलग बैंकों में पचास से ज्यादा खाते खोले थे। रामनरेश रायबरेली में मोबाइल चोरी के एक मामले में गिरफ्तार किया था। जेल में उसकी रूपेश से मुलाकात हुई थी और वह इस धंधे से जुड़ गया।
बाहरी जिले की साइबर सेल ने पश्चिम विहार में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। पुलिस ने सेंटर के मालिक समेत 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसमें 8 महिला टेली कॉलर शामिल है। आरोपी नामी कंपनी के फोन को सस्ते दाम पर देने का झांसा देकर ठगी करते थे।
जिला पुलिस उपायुक्त परविंदर सिंह ने बताया कि गिरफ्तार कॉल सेंटर के मालिक की पहचान बहादुरगढ़ स्थित बापरोड़ा पाना गांव निवासी अजीत है। गिरफ्तार अन्य लोगों की पहचान फुरकान, प्रभादित, यशपाल उमेश, नितिन, संजना, लता, काजल, प्रिया, नैना, पूजा, कीर्ति और नीलम के रूप में हुई है। जांच में पता चला कि दो महीना पहले ही कॉल सेंटर को खोला गया था। कॉल सेंटर जिस कमरे में चल रहा था उसका किराया पचास हजार रुपये था।
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि साइबर सेल को पश्चिम विहार में कॉल सेंटर चलने की जानकारी मिली थी। निरीक्षक हरिंदर सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने उक्त सेंटर पर छापा मारा। उस समय वहां काम कर रही टेलीकॉलर लोगों ने बात कर रही थी। पुलिस ने यहां से दो सीपीयू, एक लेपटाप, नौ मोबाइल फोन, एक मानीटर, एक सिम कार्ड सर्वर के साथ 32 सिम कार्ड, एक फोन, 20 रजिस्टर, राउटर, एक बार कोर्ड स्केनर और एक प्रिंटर जब्त किया।
जांच में पता चला कि सेंटर का मालिक अजीत पहले कॉल सेंटर में काम करता था। दो माह पहले उसने खुद कॉल सेंटर खोला और ठगी करने लगा। सेंटर से दिल्ली के बाहर रहने वाले लोगों को फोन किया जाता था। लोगों से कहा जाता था कि जिस मोबाइल की कीमत 20 हजार रुपये हैं, उसे पांच हजार में दिया जाएगा।
इनके झांसे में आने वाले का पैसे ऑनलाइन भुगतान करने के लिए कहा जाता था। पैसे आने के बाद अजीत पैकेट में साबुन व अन्य चीज रखकर भेज देता था। जांच में पता चला कि अजीत ने फर्जी पते पर डाकघर में फर्म का रजिस्ट्रेशन करवाया था। कोई अगर नकद में भुगतान करता था तो पैसे उसके खाते में चले जाते थे। अब तक चार पांच लाख रुपये की ठगी की बात सामने आई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।