नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल में कैदी अंकित गुज्जर की हत्या मामले में जेल अधिकारियों से स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। इसके अलावा अदालत ने मामले में दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच ब्यूरो को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने साथ ही घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज को भी संरक्षित करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने यह निर्देश अंकित गुजर के परिजनों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। परिजनों ने इस हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। इतना ही नहीं परिवार ने अपनी सुरक्षा की भी मांग की है। अंकित गुजर की 4 अगस्त को तिहाड़ जेल में हत्या हुई थी। 29 वर्षीय गुज्जर अपनी जेल कोठरी में मृत पाया गया था।
याची के अधिवक्ता महमूद प्राचा और शारिक निसार ने अदालत को बताया कि गुर्जर को जेल अधिकारियों द्वारा परेशान किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि अंकित के साथ जेल में क्रूरता की गई थी। उसे बिना किसी चिकित्सा सुविधा के एकांत कमरे में मरने के लिए छोड़ दिया गया। जेल अधिकारी जेल में संगठित जबरन वसूली सिंडिकेट चला रहे हैं।
याची ने आरोप लगाया कि अंकित के साथ मारपीट के दौरान एक अधिकारी ने सीसीटीवी को बंद करने का आदेश दिया था। याची के अधिवक्ता ने कहा कि यह हत्या योजनाबद्ध तरीके से जेल अधिकारियों ने करवाई है ताकि अन्य कैदियों में भय पैदा करने और उनकी हर बात को मानने के लिए बाध्य कर सकें।
उन्होंने कहा मृतक के साथ जो क्रूरता हुई, वह उसके शव की तस्वीरों से स्पष्ट है। इसके अलावा उसे बिना किसी चिकित्सा के अकेले सेल में मरने के लिए छोड़ दिया गया था। इसके मद्देनजर वर्तमान मामला दुर्लभ श्रेणी का है।
याचिका में कहा गया है कि हालांकि एक मजिस्ट्रेट अदालत के निर्देशों के अनुसार हत्या के अपराध की प्राथमिकी दर्ज की गई थी लेकिन एक निष्पक्ष जांच एजेंसी द्वारा स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है। अदालत ने मामले की सुनवाई सितंबर में तय की है।