नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने चीनी खुफिया अधिकारियों को संवेदनशील सूचनाएं देने के मामले में आरोपी स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आरोपी को मनी लांड्रिंग जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने जांच एजेंसी को दो सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने उन्हें कथित तौर पर अवैध वित्तीय लेनदेन के साथ पत्रकार के कनेक्शन को स्पष्ट करने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले की सुनवाई 9 सितंबर तय की है।
अदालत ने कहा आरोपी पर लगाए गए आरोप स्पष्ट होने चाहिए। यदि उसने संबंधित कंपनियों से पैसे लिए हैं तो यह गैरकानूनी अपराध है। वहीं ईडी के वकील जोहेब हुसैन ने बताया कि आरोपी शर्मा को चीनी नागरिक द्वारा संचालित कंपनी से नकदी मिली और जांच चल रही है। उन्होंने कहा आरोपी को अब तक 48 लाख रुपये मिलने की पुष्टि हो चुकी है।
वहीं शर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर ने कहा कि कथित मनी लांड्रिंग की अपेक्षा मामला ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत बनता है, जिसमें उनके मुवक्किल को पिछले साल जमानत पर रिहा किया गया था। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने दिसंबर 2020 में जमानत दी तो ईडी ने फरवरी 21 में मामला दर्ज कर लिया।
कहा, उनके मुवक्किल ने जांच में सहयोग किया लेकिन उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा उनके मुवक्किल ने जांच एजेंसी को अपने बैंक खाते से लेनदेन की पूरी जानकारी दे दी है।
इससे पहले निचली अदालत आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर चुकी है। अदालत ने कहा था कि आरोपी ने संबंधित कंपनियों से लाखों रुपये नगद लिए हैं। अदालत ने कहा था कि अभियुक्त की वार्षिक आय बमुश्किल 8.6 लाख रुपये बताई गई है। फिर भी वह अपने बेटे की विदेश में पढ़ाई का खर्च वहन कर रहा है। इसके अलावा स्वयं भी कई विदेश यात्राएं कर चुका है। यहां तक कि निवेश के उद्देश्य से अपने दोस्तों और परिचितों को लाखों रुपये उधार दे रहा है।
वहीं ईडी का आरोप है कि उसकी जांच में पाया गया कि आरोपी ने चीनी खुफिया अधिकारियों को गोपनीय और संवेदनशील जानकारी देने के एवज में लाखों रुपये लिए। ये दस्तावेज भारत की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से समझौता करने के समान है।