जल्द हर्ड इम्युनिटी बनने की उम्मीद
उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि इस संबंध में एक उम्मीद की किरण दिखती है और हमें सतर्कता के साथ आगे बढ़ना है। हमारी रणनीति ऐसी होनी चाहिए कि हम सबसे बुरे के लिए तैयार हों और सबसे अच्छे की उम्मीद करें। बड़ी संख्या में लोग एसिम्प्टोमेटिक (बिना लक्षण के) हैं, जो एक तरीके से अच्छा है क्योंकि इससे हर्ड इम्युनिटी बढ़ सकती है। बेशक यह संक्रमण को और फैलने से रोकने के लिए एक प्रतिरोधी बैरियर बनाने वाला है।
ज्यादा जनसंख्या एक बड़ी चिंता
डॉ. चंद्रा ने लोगों के अस्पताल में भर्ती होने पर चिंता जताई और एहतियात बरतने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारी दूसरी बड़ी चिंता बड़ी जनसंख्या है। तो अगर एक प्रतिशत जनसंख्या को भी अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ी तो यह बहुत बड़ी संख्या है। हम अपना स्वास्थ्य ढांचा ढहाना नहीं चाहते हैं। और इस नजर से यह प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी बन जाती है। उन्हें यह कहते हुए कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए कि यह बहुत हल्का संक्रमण है। तो उन्हें ना सिर्फ अपने लिए बल्कि पूरे समुदाय के लिए काफी सावधान रहना है।
डॉक्टरों को रखना होगा सुरक्षित
उन्होंने आगे कहा कि उनकी टीम में सबसे ज्यादा रेजीडेंट डॉक्टर बीमार हैं और अगर बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी बीमार पड़ते हैं तो इससे पूरा तंत्र परेशानी में पड़ जाएगा। हमें अपने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा करनी होगी। उन्हें पूरी एहतियात बरतनी होगी क्योंकि वे फ्रंटलाइन पर हमारे सैनिक हैं। तो अगर वे बीमार हो जाएंगे तो सभी मरीजों की देखभाल कौन करेगा। मेरी यूनिट में 50 प्रतिशत से ज्यादा रेजीडेंट डॉक्टर बीमार हैं। उन्हें हल्के लक्षण हैं और वे ठीक हो रहे हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि वे काम करने की हालत में नहीं हैं। तो यह बहुत महत्वपूर्ण है कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा हमें ना सिर्फ अपने लिए बल्कि कोरोना से खतरे में पड़े हर व्यक्ति की देखभाल के लिए करनी होगी।