विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद पार्टी के पांच राज्यों के अध्यक्षों ने अपना इस्तीफा सौंपा था, उनमें से चार राज्यों को नया अध्यक्ष मिल गया, लेकिन महासचिव प्रियंका गांधी अपने प्रभार वाले राज्य का अध्यक्ष नहीं तय कर पा रही हैं।
कांग्रेस नेतृत्व 115 दिनों के बाद भी यूपी को नया प्रदेश अध्यक्ष नहीं दे पाया है। विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद पार्टी के पांच राज्यों के अध्यक्षों ने अपना इस्तीफा सौंपा था, उनमें से चार राज्यों को नया अध्यक्ष मिल गया, लेकिन महासचिव प्रियंका गांधी अपने प्रभार वाले राज्य का अध्यक्ष नहीं तय कर पा रही हैं।
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प्रियंका ने भी अब मान लिया है कि जिस फार्मूले से उन्होंने यूपी में संगठन का ताना बाना बुनना चाहा था और उम्र का बैरियर लगाकर नई शुरुआत की कोशिश की, वह पूरी तरह फेल हुई। अजय सिंह लल्लू के नेतृत्व में कांग्रेस सड़कों पर संघर्ष करती तो दिखी, लेकिन नतीजों में और पिछड़ गई।
नये फार्मूले से युवाओं व बुजुर्ग नेताओं में दूरियां बढ़ीं।
फार्मूले में फिट न बैठने वाले नेता पार्टी छोड़कर चले गए। इस बार अध्यक्ष की कमान सौंपने के लिए अनुभवी नेताओं के कंधे खोजे जा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई संभालने का तैयार नहीं हुआ है।
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पुनिया और तिवारी को मनाने में जुटीं प्रियंका को सफलता नहीं
प्रियंका गांधी अपने राज्य में कोई फैसला न पाने को लेकर चिंतित हैं लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। प्रियंका ने राज्य के वरिष्ठ दलित नेता और छत्तीसगढ़ के प्रभारी पीएल पुनिया और अभी ब्रेक के बाद फिर राज्यसभा पहुंचे कद्दावर नेता प्रमोद तिवारी के कंधे पर यूपी की जिम्मेदारी का बोझ रखना चाहा, लेकिन दोनों ही इसके लिए तैयार नहीं हैं।