वहीं दूसरी ओर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस (यूसीएमएस) के डॉक्टरों ने भी इसी मुद्दे को लेकर शाहदरा जिला आयुक्त कार्यालय तक विरोध रैली निकाली। यहां रास्ते में अलग अलग चौराहों पर डॉक्टरों ने प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया। इसके बाद उन्होंने जिला आयुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए नीट काउंसलिंग जल्द से जल्द कराने की मांग की है।
इस दौरान डॉक्टरों ने कहा कि जब तक काउंसलिंग की तारीख घोषित नहीं होगी तब तक हड़ताल जारी रहेगी। यह सभी डॉक्टर जीटीबी अस्पताल में कार्यरत हैं। यहां हड़ताल का आंशिक असर देखने को मिल रहा है लेकिन चर्चा है कि अगले एक से दो दिन में यहां भी पूरी तरह से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
डॉक्टरों पर बना रहे हैं दबाव
सफदरजंग की रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के महासचिव डॉ. अनुज अग्रवाल ने बताया कि डॉक्टरों की हड़ताल के बावजूद भी सरकार उनकी मांग पूरी नहीं कर रही है। जब तक काउंसलिंग को लेकर सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। वहीं आरएमएल अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर मनीष कुमार का कहना है कि हड़ताल खत्म करने के लिए प्रशासन की ओर से दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन डॉक्टर अपने निर्णय पर कायम हैं। मांग पूरी होने तक वह काम पर नहीं लौटेंगे।
एम्स का समर्थन भी जारी
इनके अलावा एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने भी हड़ताल का समर्थन किया है। अस्पताल की रेजिडेंट एसोसिएसन का कहना है कि इस समय देश में करीब 42 हजार एमबीबीएस डॉक्टर नीट पीजी काउंसलिंग का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन काउंसलिंग न होने से अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी हो गई है। इससे मौजूदा डॉक्टरों पर काम का काफी दबाव है।
कोरोना महामारी में केवल एक पीजी बैच ने संभाली कमान
सफदरजंग अस्पताल के डॉ. मानेक का कहना है कि इस समय कोरोना महामारी, डेंगू, मौसमी बीमारियां और गैर कोविड मरीजों की संख्या से अस्पताल भरे हुए हैं। हर कोई इसके बारे में जानता है कि इस समय सरकारी अस्पताल में इलाज कितना चुनौती भरा है। हमारे पास स्टाफ की कमी है। केवल एक पीजी बैच है जो कोरोना की दूसरी लहर से अब तक बिना किसी रुकावट के रात दिन काम करता आया है। अब काउंसलिंग के बाद ही नया बैच आएगा तब तक का इंतजार और स्टाफ की कमी कब तक बर्दास्त की जा सकती है।